शिव परिचर्चा में उमड़े भीड़ महद्दीपुर में मासिक शिव परिचर्चा का आयोजन
शिव परिचर्चा में उमड़े भीड़
महद्दीपुर में मासिक शिव परिचर्चा का आयोजन

जे टी न्यूज, खगड़िया, पसराहा- थाना क्षेत्र के दुर्गा मंदिर महद्दीपुर में बुधवार को अनुमंडलीय मासिक एक दिवसीय शिवगुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया।
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Permalink:य ने बताया शिवगुरु परिचर्चा आधुनिक युग में आध्यात्मिकता का एक अनूठा स्वरूप है, जिसका श्रेय साहब श्री हरींद्रानंद जी को जाता है। उन्होंने इस विचार को जन-जन तक पहुँचाया कि महादेव (शिव) केवल देवताओं के देव ही नहीं, बल्कि संपूर्ण जगत के आदि गुरु भी हैं।
शिव को गुरु बनाने की प्रक्रिया अत्यंत सरल है, जिसे ‘तीन सूत्रों’ के माध्यम से संपन्न किया जाता है। पहला, दया माँगना: प्रतिदिन अपने गुरु शिव से प्रार्थना करना कि “हे शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ पर दया करें।” दूसरा, चर्चा करना: दूसरों को शिव की गुरुता के बारे में बताना और उन्हें प्रेरित करना कि शिव उनके भी गुरु हो सकते हैं।तीसरा, नमन करना: गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ‘नमः शिवाय’ मंत्र के साथ उन्हें प्रणाम करना। इस विचारधारा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। इसमें किसी विशेष कर्मकांड, दीक्षा या कठिन तपस्या की आवश्यकता नहीं होती। समाज के किसी भी वर्ग, जाति या धर्म का व्यक्ति, अपने गृहस्थ जीवन के कर्तव्यों का पालन करते हुए शिव को गुरु मान सकता है। परिचर्चाओं के माध्यम से लोग समूहों में एकत्र होते हैं और शिव के गुरु रूप पर चर्चा करते हैं। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आपसी भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार होता है। यह मनुष्य को स्वयं के भीतर झाँकने और जीवन के वास्तविक अर्थ को समझने के लिए प्रेरित करता है। चर्चा में शिव शिष्य राज कुमार गुरु भाई ने नमः शिवाय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे प्रभावशाली और पवित्र मंत्र के बारे में बताया कि इसे ‘पंचाक्षरी मंत्र’ कहा जाता है क्योंकि यह पाँच अक्षरों— न, म, शि, वा, य —से मिलकर बना है।

अर्थ: इसका सरल अर्थ है “भगवान शिव को नमस्कार” या “मैं उस परम तत्व को प्रणाम करता हूँ।” इस मंत्र के पाँच अक्षर सृष्टि के पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र का निरंतर जाप मन को शांति देता है, नकारात्मकता को दूर करता है और साधक को मोक्ष की ओर ले जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी भी समय और किसी भी स्थान पर श्रद्धापूर्वक जपा जा सकता है। नमः शिवाय मात्र एक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से जुड़ने का एक सरल मार्ग है। शिव परिचर्चा के मौके पर शिव शिष्या मीरा देवी प्रतिमा गुरु बहन, वंदना गुरु बहन, पूर्णिमा गुरु बहन, हीरामणि गुरु बहन, रंजन गुरु बहन, सीमा गुरु बहन, सुमन गुरु बहन, रामजी गुरु भाई, अशोक गुरु भाई, राम बहादुर गुरु भाई, बंटी गुरु बहन, कृतलाल गुरु भाई, बनारसी गुरु भाई, रामविलास गुरु भाई, संजय गुरु भाई, गुरुदेव गुरु भाई, वाल्मीकि गुरु भाई, घनश्याम गुरु भाई, अरविंद गुरु भाई, नरेश गुरु भाई सहित सैकड़ों शिव शिष्य मौजूद थे।



