महाविद्यालय के छात्र–छात्राओं के खिले चेहरे शीत लहर और कड़ाके की ठंड को मुंह चिढ़ाते प्रतीत हो रहे थे
महाविद्यालय के छात्र–छात्राओं के खिले चेहरे शीत लहर और कड़ाके की ठंड को मुंह चिढ़ाते प्रतीत हो रहे थे

जे टी न्यूज, मुंगेर: रविवार को मुंगेर विश्वविद्यालय के क्षेत्राधीन श्री कृष्ण रामरूचि महाविद्यालय शेखपुरा में भीषण ठंड के बावजूद उत्साह और उमंग अपने शबाब पर था। विविध परिधानों में सजे महाविद्यालय के छात्र–छात्राओं के खिले चेहरे शीत लहर से उत्पन्न कड़ाके की ठंड को मुंह चिढ़ाते प्रतीत हो रहे थे। कुल मिला कर छात्र–छात्राओं के कहकहों और ठहाकों से दुल्हन की तरह सजे महाविद्यालय में हर तरफ हर्ष और उल्लास से माहौल गर्म था।
परंपरा और आधुनिकता का संगम सिर्फ इतिहास में नहीं :
अवसर था श्री कृष्ण रामरूचि महाविद्यालय ने रविवार को अपने संस्थापक श्री कृष्ण प्यारे मोहन सिंह की 125वीं जयंती और वार्षिकोत्सव का। इस दोहरे उत्सव के अवसर पर महाविद्यालय ने, “परंपरा और आधुनिकता का संगम सिर्फ इतिहास में नहीं, बल्कि वर्तमान में भी जीवंत रूप से संभव है” को समारोहपूर्वक शानदार अंदाज में साकार किया।
अतिथि का स्वागत करते प्राचार्य व अन्य।
कुलसचिव ने किया उद्घाटन :

इस अवसर पर सर्वप्रथम मुख्य अतिथि मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो (डॉ) घनश्याम राय का भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात पुष्प गुच्छ, स्मृति चिन्ह आदि से सम्मानित किया गया। छात्राओं द्वारा भाव पूर्ण स्वागत गीत और स्वागत संबोधन के उपरांत डॉ राय ने फीता काट कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

प्रतिमा स्थल पर कुलसचिव व अन्य।
संस्थापक को किया नमन :
इसके पूर्व डॉ राय सहित अतिथियों, महाविद्यालय के प्राचार्य व प्राध्यापकों ने श्री कृष्ण प्यारे मोहन सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें सदर नमन किया।
कुलसचिव ने छात्रों की प्रतिभा को जम कर सराहा :
अपने संबोधन के दौरान डॉ राय ने महाविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य, उसकी ऐतिहासिक उपलब्धियों, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान पर विस्तृत चर्चा की और छात्रों के प्रतिभा को जम कर सराहा।

स्वागत गीत प्रस्तुत करती छात्राएं।
छात्र –छात्राओं की प्रस्तुति ने बंधा समां :
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक विरासत, महाविद्यालय की परंपरा और गौरव को जीवंत रूप में पेश कर अतिथियों को चमत्कृत कर दिया। छात्रों ने ऐसा समां बांधा कि

