श्रद्धा और सम्मान के साथ मनायी गई कांशीराम की 92वीं जयंती
श्रद्धेय कांशीराम का जीवन सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक – राकेश पासवान शास्त्री
श्रद्धा और सम्मान के साथ मनायी गई कांशीराम की 92वीं जयंती

जे टी न्यूज, खगड़िया:
बहुजन समाज के महान चिंतक और सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत कांशीराम की 92वीं जयंती रविवार को रहीमपुर मध्य पंचायत अंतर्गत ग्राम नन्हकू मंडल टोला स्थित मेनका–कार्तिकेय सदन के सभाकक्ष में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनायी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता दलित युवा संग्राम मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष तथा जनता दल (यूनाइटेड) के जिला प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा कांशीराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद सामाजिक न्याय और समानता विषय पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने उनके जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला

गोष्ठी को संबोधित करते हुए आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन दलित, वंचित, शोषित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और उपेक्षित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को समाप्त कर समतामूलक समाज के निर्माण का सपना देखा और उसके लिए निरंतर संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि कांशीराम की दूरदर्शी सोच और सशक्त नेतृत्व ने देश की राजनीति की दिशा और दशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित करने का ऐतिहासिक कार्य किया।
शास्त्री ने कहा कि कांशीराम ने “बाबा साहेब का मिशन अधूरा, कांशीराम करेंगे पूरा”, “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” और “वोट हमारा, राज तुम्हारा—नहीं चलेगा” जैसे नारों के माध्यम से बहुजन समाज में राजनीतिक चेतना जगाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि इन नारों ने समाज के सोए हुए वर्गों को जागृत कर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाया।
उन्होंने आगे कहा कि वास्तव में कांशीराम का संपूर्ण जीवन सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक रहा है, जो आज भी समाज के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायी है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों और विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया तथा उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम में किसान सलाहकार अंकेश कुमार, रघुवीर पासवान, रामाकांत पासवान, सूर्यवंश, कुमारी कीर्ति, कल्पना कुमारी, अभिषेक कुमार रीतीक कुमार,म एवं मेनका देवी,ईशा देवी सहित स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने कांशीराम के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।


