पूर्णिया नगर निगम में बवाल: अभियंता पर भ्रष्टाचार के आरोप, पार्षदों का खुला मोर्चा
टेंडर में ‘कमीशन खेल’ का आरोप, बोर्ड ने हटाने का प्रस्ताव पारित—अब सरकार की कार्रवाई पर नजर
पूर्णिया नगर निगम में बवाल: अभियंता पर भ्रष्टाचार के आरोप, पार्षदों का खुला मोर्चा
टेंडर में ‘कमीशन खेल’ का आरोप, बोर्ड ने हटाने का प्रस्ताव पारित—अब सरकार की कार्रवाई पर नजर

जे टी न्यूज, पूर्णिया:
नगर निगम पूर्णिया में इन दिनों सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। वार्ड पार्षदों ने नगर विकास अंचल, पूर्णिया में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता (असैनिक) और सहायक अभियंता संजय कुमार द्विवेदी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी है।
पार्षदों ने दोनों अभियंताओं की कार्यशैली को मनमानी, संवेदनहीन और भ्रष्टाचार से ग्रसित बताते हुए सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग और निगरानी विभाग तक शिकायत भेज दी है।
*“बिना कमीशन नहीं पास होता टेंडर” — पार्षदों का आरोप*
पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम के सभी तकनीकी कार्यों का निपटारा नगर विकास अंचल कार्यालय से होता है, लेकिन यहां टेंडरों को या तो जानबूझकर लटकाया जाता है या रद्द करने की अनुशंसा कर दी जाती है।
आरोप यह भी है कि बिना “कमीशन” के कोई भी निविदा पास नहीं होती।
* NIT-06/2025-26, NIT-14/25-26 और NIT-16/25-26 को भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया गया।
* एक ही परिवार के दो संवेदकों को लाभ देने और अन्य योग्य ठेकेदारों को अयोग्य ठहराने का भी आरोप।
*ऑफिस में अव्यवस्था, अधिकारी गायब!*
पार्षदों ने दावा किया कि अधीक्षण अभियंता अक्सर बिना सूचना के कार्यालय से गायब रहते हैं, जिसकी पुष्टि मोबाइल लोकेशन से भी की जा सकती है।
इस दौरान सहायक अभियंता संजय कुमार द्विवेदी और कंप्यूटर ऑपरेटर वासुकी नाथ ठाकुर पर कार्यालय में अनियमितता और अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है।
*“मानसून में जनता भुगतेगी खामियाजा”*
पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आगामी बारिश और मानसून में शहर की हालत बदतर हो सकती है। अधूरी योजनाओं का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
*बोर्ड का फैसला, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं*
नगर निगम बोर्ड की 21 जनवरी 2026 की बैठक में इन अधिकारियों को हटाने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पार्षदों ने सरकार से “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत उच्चस्तरीय जांच और दोषियों की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।
*अब सबकी नजर सरकार पर*
इस पूरे मामले ने नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या सरकार करेगी सख्त कार्रवाई या मामला फाइलों में दब जाएगा?
पूर्णिया की जनता और जनप्रतिनिधि अब इसी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
