15 वर्ष से ऊपर के किशोरों के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है कोविड वैक्सीन
15 वर्ष से ऊपर के किशोरों के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है कोविड वैक्सीन
कोविड-19 से बचने के लिए बूस्टर डोज़ का टीकाकरण जरूरी: डीएम

जेटी न्यूज
डी एन कुशवाहा
बेतिया पश्चिमी चंपारण – जिलेभर में कोविड-19 सेकंड डोज टीकाकरण अभियान को सफल बनाने व बूस्टर डोज़ लगवाए जाने के लिए भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिलाधिकारी कुन्दन कुमार ने बताया कि यदि आपकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो या फिर आप ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, सांस लेने में तकलीफ या किसी अन्य बीमारी से ग्रसित हों तो दूसरे टीके के 9 महीने बाद तीसरा टीका अवश्य लगवाएं। इससे आप कोविड से सुरक्षित होंगे। बूस्टर डोज लगवाने के कारण आपको एवं आपके परिवार को कोरोना का ज्यादा भय नहीं रहेगा। अगर किसी कारणवश संक्रमित हो भी गये तो आपके शरीर पर इसका ज्यादा गंभीर असर नहीं रहेगा।

– कोविड प्रोटोकॉल का पालन अवश्य करें;
सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन अवश्य करें । किसी भी जरूरी आवश्यक कार्य करते समय मास्क अवश्य लगाएं, इससे आप धूल मिट्टी प्रदूषण के साथ लोगों के साथ संपर्क होने पर कोरोना संक्रमण से भी बचेंगे।
– जागरूकता के साथ हो रहा है कोविड टीकाकरण ,सही समय पर दोनों डोज़ जरूर लें
डीआईओ डॉ अवधेश कुमार ने कहा कि 15 वर्ष से ऊपर के किशोरों के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर जागरूकता के साथ कोविड टीकाकरण किया जा रहा है । परन्तु सही समय पर दोनों डोज़ लेना भी बहुत जरूरी है । क्योंकि, वैक्सीन ना सिर्फ पूर्णतः सुरक्षित है बल्कि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए काफी प्रभावी है। कोविड से बचाव के लिए सबसे बेहतर और कारगर उपाय भी है। इससे ना सिर्फ कोई एक व्यक्ति विशेष सुरक्षित होगा बल्कि, पूरा समुदाय सुरक्षित होगा और सभी लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। सभी टीकाकरण केन्दों पर पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन वाइल की व्यवस्था की गई है। वहीं,ऑन द स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी सुनिश्चित की गई है। ताकि सभी लाभार्थी को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन मिल सके।
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें।


