सात निश्चय से संवर सकता है अतिथि शिक्षकों का शैक्षणिक भविष्य:- प्रो. मो. रहमतुल्लाह

सात निश्चय से संवर सकता है अतिथि शिक्षकों का शैक्षणिक भविष्य:- प्रो. मो. रहमतुल्लाह

महारानी कल्याणी महाविद्यालय में आयोजित “प्रधानाचार्य-अतिथि शिक्षक संवाद कार्यक्रम” में बोले प्रधानाचार्य
जे टी न्यूज

लनामिवि दरभंगा:- आज दिनांक 28 अप्रैल 2023 को स्थानीय महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा में प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह की अध्यक्षता में “प्रधानाचार्य-अतिथि शिक्षक संवाद कार्यक्रम” प्रधानाचार्य कक्ष में आहूत की गई।*

प्रधानाचार्य-अतिथि शिक्षक संवाद कार्यक्रम” को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह ने कहा कि आज के दिन “प्रधानाचार्य-अतिथि शिक्षक संवाद कार्यक्रम” मुख्य रूप से अतिथि शिक्षकों के लिये आयोजित की गई है। यह बैठक आपके शैक्षणिक जीवन में ज्यादा से ज्यादा निखार कैसे मिले, जिससे आपको भी नौकरी में स्थायित्व मिल सके और महाविद्यालय के छात्र-छात्रा भी लाभान्वित हो सके। इस पर अपने जीवन के अनुभवों को आपके साथ शेयर कर रहा हूँ। भारत व खासकर बिहार ज्ञान की भूमि रही है। इतिहास गवाह है जब-जब दुनिया को जरूरत आन पड़ी है, तब-तब भारत व बिहार ने अपने ज्ञान के परंपरा से दुनिया को मार्ग दिखाया है। सिर्फ शिक्षा ही एक ऐसा मार्ग है जिससे दुनिया को प्रकाशमान किया जा सकता है और विकसित राष्ट्रों की कतार में शामिल करा सकता है। अपने आप में यह एंटीबायोटिक है।

इससे ज्यादा पावर दुनिया में किसी चीज में नहीं है। असलहा-कारतूस को भी दबाने का माध्यम मात्र सिर्फ कलम व शिक्षा ही है और उस शिक्षा के प्रति नई पीढ़ी में जागृति लाना व उन्हें ढ़ालना और रोजगार से जोड़ने का दायित्व आप सभी शिक्षकों पर है। आप अभी अतिथि शिक्षक के रूप में महाविद्यालय व विश्वविद्यालय को अपना सेवा दे रहे हैं लेकिन अपने भविष्य के प्रति आप सदैव संशय में हैं और चिंतित हैं कि आपके शैक्षणिक भविष्य को क्या स्थायित्व ठिकाना मिलेगा या नहीं। महाविद्यालय-विश्वविद्यालय के ही नहीं बल्कि उच्च शिक्षा और समाज के कर्णधार हैं आप अतिथि शिक्षक। इसीलिए मैं आज आपको सफलता के 7 निश्चय से रूबरू कराता हूँ। मेरे द्वारा सुझाये गये सफलता के 7 निश्चय से संवर सकता है आपका शैक्षणिक भविष्य। आज और इस पल खुद को दृढ़ संकल्पित करें कि हमें इस सातों निश्चय को खुद भी आत्मसात करना है और छात्रों को भी इसके लिये प्रेरित करना है।*
पहले निश्चय के तहत अपने रिज्यूम में हर साल अपनी उपलब्धि कैसे बढ़े व बेहतर हो इसके लिये अपने माइंडसेट को ढ़ालें। शिक्षा ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां नौकरी पाना सिर्फ मुकाम नहीं है बल्कि आजीवन आपको पढ़ाई जारी रखनी होती है। ताकि समाज को कुछ नया दिया जा सके।


दूसरे निश्चय के तहत रिज्यूम के अनुकूल हर महीने-दो महीने के अंदर शोध-आलेख लिखें और उसे प्रतिष्ठित जर्नल में छपवाएं। साथ ही सेमिनार, कांफ्रेस, सिंपोजिया व वर्क शॉप के साथ-साथ सांस्कृतिक व महाविद्यालय के सभी गतिविधियों आदि में अनिवार्य रूप से भाग लें। यह आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा।
तीसरे निश्चय के तहत विभाग के पुस्तकालय में पारंपरिक से लेकर नवीन लेखकों के प्रतिष्ठित किताबों का संकलन रखें। पारंपरिक व नवीन लेखकों के किताबों को समन्वय बनाकर अध्ययन करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बदलते युग व समय के साथ विषय-वस्तु की दिशा व दशा का अनुभव होता रहेगा कि वक्त के हिसाब से विषय-वस्तु में क्या करवटें ले रही है। इससे छात्र-छात्राओं को भी दीक्षा प्रदान करने में सहूलियत होगी और उसे भी आप समय की रफ्तार के साथ ढ़ाल सकेंगे। अगर आपके पास कोई भी पारंपरिक व नवीन लेखकों का किताब नहीं है तो उसकी सूची बनाकर अगले कार्यदिवस तक आप बर्सर साहब को उपलब्ध करा दें। अगले एक सप्ताह में सभी विभागों में किताबों की खरीद अनिवार्य रूप से सुनिश्चित हो जानी चाहिये।
चौथा निश्चय के तहत प्रत्येक दिन कम से कम खुद भी 2-3 घंटे घर पर स्वाध्याय करने को आदतों में शुमार करें। इससे आपका हर अध्यायों व किताबों का रिवीजन होता रहेगा जिससे विद्यार्थी भी स्पष्ट कांसेप्ट से रूबरू होते रहेंगे और साक्षात्कार में तो आपको फायदा मिलेगा ही।*


पांचवें निश्चय के तहत उर्दू में एक शेर है कि खत के मजमून को समझ जाते हैं लोग लिफाफे को देखकर कि अंदर खत की स्याही क्या बयां कर रहा है। इसीलिए अपने पर्सनैल्टी को समय की रफ्तार से जोड़े रखें और इसे कभी न कम होने दें और ना ही टूटने दें। आपका ड्रेस, आपका बॉडी लैंग्वेज, आपका भाषाशैली, आपका कार्यप्रणाली व आपका कॉन्फिडेंस लेबल कैसा है। यह सामने वाले को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। सामने वाले को पहली नजर में इम्प्रेस्ड करने का यह सबसे सशक्त व सुगम माध्यम है।
छठे निश्चय के तहत विषय-वस्तु के साथ-साथ थीसिस का ओवरऑल अध्ययन करते रहें। क्योंकि दुनिया जानती है कि जिस विषय पर आपको डॉक्टरेट मिला है, वो काम सिर्फ आपका है और बोर्ड आपसे यह अपेक्षा रखता है कि आपकी जानकारी और पकड़ उस विषय पर 100% है और आप उस विषय के विशेषज्ञ हैं।*


सांतवें व अंतिम निश्चय के तहत अपने अंदर के झिझक को खत्म करें। दुनिया का सबसे बड़ा मनोरोग है झिझक। अच्छे-अच्छे शिक्षक व वक्ता इंटरव्यू बोर्ड के सामने या किसी भी मंच पर जाकर नर्वस हो जाते हैं या तो दवाब व फ्रस्टेशन में आकर कुछ बोल ही नहीं पाते हैं और अगर बोलते हैं तो अनाप-शनाप विषय-वस्तु से हटकर रुक-रुक कर बोलते हैं जिसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ता है। पर आपको सबसे पहले यह समझना होगा कि आपलोग कहीं न कहीं नेट या पी-एच.डी. के माध्यम से शिक्षक बने हैं। आप किसी से कम थोड़े न हैं। आप में पात्रता, योग्यता व इसे पाने का सामर्थ्य भरा हुआ है। इसीलिए झिझक को खत्म करें व आत्म विश्लेषण व मंथन करें। इससे आपको कांफिडेंस लेबल को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।


अगर इन सातों निश्चय को अपने जीवन में आप उतार लेते हैं तो यकीनन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के द्वारा निकट भविष्य में आयोजित होनेवाली साक्षात्कार को आसानी से क्रैक कर पाएंगे और महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को तो इसका लाभ मिलेगा ही।
इस मौके पर महाविद्यालय के बर्सर सह भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शम्से आलम व सभी अतिथि शिक्षक उपस्थित थे। अतिथि शिक्षकों की ओर से डॉ. दिवाकर नाथ झा ने “प्रधानाचार्य-अतिथि शिक्षक संवाद कार्यक्रम” के बाबत प्रधानाचार्य का स्वागत किया जबकि समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ डॉ. शम्से आलम ने किया।*

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