अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय कौंसिल की तीन दिवसीय बैठक दूसरे दिन जारी
अखिल भारतीय किसान सभा की राष्ट्रीय कौंसिल की तीन दिवसीय बैठक दूसरे दिन जारी
-प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज: ए आई के एस के राष्ट्रीय महासचिव का. बीजू कृष्णन ने संगठनात्मक प्रतिवेदन बैठक में पेश किया। उन्होंने ने कहा कि देश के सभी राज्यों किसान सभा की संगठन के चलते पूरे देश में किसानों के सवालों पर आन्दोलन चलाते हैं।लेकिन मोदी सरकार की किसान मजदूर विरोधी तथा कारपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ एक मजबूत आन्दोलन खड़ा करने के लिए हमें संगठन को और मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कहा था कि स्वामीनाथन कमीशन की अनुसंशाओं को लागू करेंगे।न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देंगे।सभी किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाएंगे।2020 बिजली बिल को वापस करेंगे।किसानों को खाद बीज पर अनुदान देंगे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का किसानों के साथ किए गए वादा पूरी तरह झूठा निकला।अभी महाराष्ट्र में 6 महीने में 1700 किसान आत्महत्या कर लिए।लेकिन किसानों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं दिया।बल्कि अडानी, अम्बानी और कारपोरेट जगत को किसानों की जमीनों को आज भी दे देने की रणनीति तैयार करने में लगी हुई है।

केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 26 जनवरी 23 को देश के अधिकांश जिलों में ट्रेक्टर मार्च निकाला गया। उस दिन ट्रेक्टर मार्च रोकने के सरकार द्वारा असफल प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि 9 अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर कारपोरेट लुटेरों भारत छोड़ो नारों के साथ 439 जिलों में सफल आंदोलन हुए।आजादी की पूर्व रात्रि में सैकड़ों जिलों में रतजगा कार्यक्रम के अवसर पर शहर के महत्वपूर्ण जगहों पर , रेलवे स्टेशनों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम,कविता पाठ तथा नारेबाजी 1 बजे रात्रि तक होते रहे। 15 अगस्त को किसान सभा कार्यालयों पर राष्ट्रीय झण्डा फहराया गया तथा ऐतिहासिक तिरंगा मार्च निकाला गया।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को ताल कटोरा दिल्ली सम्मेलन से संयुक्त किसान मोर्चा से 10 केंद्रीय मजदूर संगठन के एकजुट हो जाने से किसानों मजदूरों की मजबूत एकता बनी है । उस एकता के बल पर हमारा संघर्ष आगे बढ़ रहा है।
3 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी किसान हत्या के खिलाफ तथा किसानों का हत्यारा अजय मिश्र टेनी को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री से बर्खास्त कर हत्या का मुकदमा कर जेल देने की मांग की गई।
26 से 28 नवम्बर को एस के एम के आह्वान पर देश के सभी राज्यों के राजभवनों पर तीन दिवसीय महापड़ाव किया गया। जिसमें देश के लाखों किसान मजदूर भाग लिए।11 दिसम्बर को सभी जिला पदाधिकारियों के माध्यम से संयुक्त किसान मोर्चा तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों के साथ किए गए वादा खिलाफी के विरुद्ध मांगपत्र दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस किसान विरोधी मोदी सरकार को आगामी लोकसभा चुनाव में हराने के लिए गांव गांव में जाकर किसानों को गोलबंद करना होगा।




