संयुक्त किसान मोर्चा ‘कारपोरेट भारत छोड़ो’ दिवस के रूप में मनाएगा

संयुक्त किसान मोर्चा ‘कारपोरेट भारत छोड़ो’ दिवस के रूप में मनाएगा
जे टी न्यूज, पटना:


आगामी 9 अगस्त को अंग्रेजों भारत छोड़ो दिवस को संयुक्त किसान मोर्चा’कारपोरेट भारत छोड़ो’ दिवस के रूप में मनाएगा।9 अगस्त 2024 को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना एवं प्रदर्शन आयोजित कर किसान सरकार से अपना 21 सूत्री मांगों को पूरा करने की मांग करेंगे।

बक्सर में चौसा के किसानों के सवालों को लेकर 9 अगस्त से फिर लड़ाई शुरू होगी। सारी मांगे हासिल करने तक संघर्ष जारी रहेगा। इस लड़ाई में शामिल होने आगे संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता बक्सर आएंगे।
17 अगस्त से सोन नहर,उत्तर कोयल नहर परियोजना, गंडक जलाशय , बदुआ जलाशय,चानन डैम ,पुनपुन नदी की समस्या,सहित संपूर्ण बिहार में बाढ़,सुखा
एवं जल जमाव के सवाल पर अलग-अलग क्षेत्रीय कन्वेंशन आयोजित कर संघर्ष का बिगुल फूँकेगे। स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम पटना में संयुक्त किसान मोर्चा,बिहार की बैठक की अध्यक्षता आशीष रंजन ने की। 10 जुलाई 2024 को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की आम बैठक में लिए गए निर्णय की रिपोर्टिंग किसान नेता दिनेश कुमार और भूप नारायण सिंह ने विस्तृत रूप से प्रस्तुत की।अगले कार्यक्रम की रूपरेखा का प्रस्ताव किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह ने प्रस्तुत की।

प्रस्ताव पर बहस करते हुए किसान नेता अनिल कुमार सिंह,अमेरिका महतो,गोपाल कृष्ण,अशोक प्रियदर्शी, उडयन राय, अश्वनी जी,प्रमोद कुमार,डॉ विनय सिंह,रघुपति जी,गोपाल शर्मा,नरेश कुमार यादव,प्रभाकर कुमार,अशोक कुमार सिंह,बैजनाथ शर्मा,व्यास प्रसाद शर्मा, बैजनाथ शर्मा,
सत्यसागर आर्य,बृजभूषण शर्मा,विजय कुमार सिंहा,श्रीकांत प्रसाद,जितेंद्र कुमार,मनोज कुमार सिंह,विकास कुमार सिंह, पशुपति पटेल,रामगुलाम सिंह,शशि रमण,नंदलाल सिंह, रामाशीष जी, हरिलाल यादव,वशिष्ठ शर्मा,मधेश्वर शर्मा सहित कुल 35 किसान नेताओं ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए बिहार के लोकल सवालों को जोड़कर बिहार में एक बड़ा किसान आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया।


संघर्ष की मुख्य मांगे है:-
(1) सी-2 के आधार पर सभी फसलों का लागत का डेढ़ गुणा दाम पर खरीदने की कानूनी गारंटी दो।
(2) किसान एवं खेत मजदूर को कर्ज मुक्ति हेतु सर्व समावेशी ऋण माफी योजना बनाओ।
(3) बिजली का निजीकरण तथा प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाओ।
(4) खाद,बीज,कीटनाशक,बिजली, सिंचाई,कृषि यंत्र,स्पेयर पार्ट्स और ट्रैक्टर जैसे कृषि इनपुट पर जीएसटी बंद करो,कृषि इनपुट पर सब्सिडी बढ़ाया जाए तथा सभी सरकारी सुविधा काश्तकारों एवं बटाईदारों को भी मिले।
(5)कॉर्पोरेट परस्त प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बंद करो। सभी फसलों एवं पशुपालन हेतु सर्व समावेशी बीमा योजना चालू करो।
(6) सभी पुरुष एवं महिला किसानों एवं खेत मजदूर को 60 साल की उम्र से ₹10000 मासिक पेंशन दो।
(7) भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्स्थापना (एल ए आर आर) अधिनियम 2013 को लागू करो। अनिवार्य रूप से हर दूसरे वर्ष सर्किल रेट में वर्तमान बाजार दर के आधार पर संशोधन किया जाए। बगैर पुनर्वास और पुनर्स्थापना का अधिग्रहण बंद हो। बुलडोजर राज को समाप्त करो। बिना पूरा मुआवजा दिए कृषि भूमि पर हाई वोल्टेज ओवरहेड वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का जबरन निर्माण बंद करो।
(8)आवारा पशुओं की समस्या का स्थाई निदान, जान माल के नुकसान पर एक करोड़ रूपया और फसलों एवं मवेशियों के नुकसान पर कीमत का 2 गुना मुआवजा दो।
(9) भारतीय दंड संहिता और सीआरपीसी की जगह जबरन थोपे जा रहे हैं तीन आपराधिक कानून को निरस्त करो। आम जनता एवं लोकतंत्र के विरुद्ध भारत में पुलिस राज काम करने के लिए लाए गए इस कानून को वापस लो।
(10) 736 सहित किसानों की याद में सिंधु /टिकरी बॉर्डर पर शहीद स्मारक का निर्माण हो तथा ऐतिहासिक किसान आंदोलन और लखीमपुर खीरी में शहीद किसानों के परिवार को उचित मुआवजा दो तथा किसान आंदोलन से जुड़े सभी मुकदमों को वापस लो।
(11) अति धनीको पर टैक्स लगाया जाए, कॉरपोरेट टैक्स बढ़ाया जाए, किसानों,मजदूरों और मेहनतकशों के बीच धन का तर्कसंगत एवं न्याय संगत वितरण हेतु वित्तीय संसाधन के लिए संपत्ति कर और उत्तराधिकार कर को फिर से चालू करो।


(12) कृषि के लिए अलग से केंद्रीय बजट पेश हो।
(13) 600 रु दैनिक मजदूरी के आधार पर साल में 200 दिन काम तथा इस योजना को पूरे भारत में वाटर सेड योजना से जोड़ा जाए।
(14) बिहार में बंद पड़े सभी चीनी,जूट एवं पेपर मिल को अविलंब चालू करो, 600 रु प्रति क्विंटल गन्ना का दाम तय करो,किसानों के बकाए का अविलंब भुगतान करो।
(15) दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर दूध पर 10रु सब्सिडी दो।
(16)बाढ़,सुखाड़ एवं जल जमाव का स्थाई निदान तथा कृषि कार्य हेतु मुफ्त में बिजली दो।
(17) सभी किसानों एवं खेत मजदूर को मुक्त चिकित्सा बच्चों को मुक्त शिक्षा एवं चिकित्सा का प्रबंध करो। आदि मांगों को लेकर आंदोलन बिहार में तेज किए जाएंगे

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