प्रखंड अंचल कार्यालय विभूतिपुर के मनमानी के विरोध में कार्यालय गेट पर धरना प्रदर्शन

प्रखंड अंचल कार्यालय विभूतिपुर के मनमानी के विरोध में कार्यालय गेट पर धरना प्रदर्शन


जे टी न्यूज़, विभूतिपुर (विनय कुमार राय) : कल अपराह्न में विभूतिपुर अंचलपदाधिकारी रणधीर रमण के द्वारा दाखिल खारिज के लिए दिए गए आवेदन को निरस्त कर दिया गया जिसके विरोध में महेश कुमार जिला सचिव मंडल सदस्य समस्तीपुर के द्वारा अपने समर्थकों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ अंचल कार्यालय के मुख्य गेट पर ही धरना प्रदर्शन पर बैठ गए और न्याय की मांग करने लगे। इनका आरोप है कि आवेदक राम नंदन प्रसाद चोडा टभका निवासी वार्ड न0 7 ने उसके द्वारा खरीदी गई जमीन के दाखिल खारिज हेतु आवेदन संख्या 37/95 के आलोक में आवेदन करीबन 7-8 माह पूर्व ही अंचल कार्यालय में जमा किया था।किंतु बीच में जमीन सर्वेक्षण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोके जाने के बहाने के आधार पर बात को टाला गया, यदपि अंचल अधिकारी के द्वारा आवेदक को आश्वासन दिया गया था कि आपका काम हो जायेगा। किंतु कल महेश कुमार आवेदक के साथ अंचल कार्यालय पहुंचकर वस्तु स्थिति की जानकारी ली तो उन्हें उनके आवेदन को निरस्तीकरण का प्रमाण दे दिया। इससे बकुलाहट में आवेदक और महेश कुमार ने अपने सैकड़ों समर्थको के साथ अनैतिक ओर अविवेकपूर्ण निर्णय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन पर बैठने को मजबूर हुए।

गरीब वंचित और शोषित आम नागरिकों के पैरोकार सीपीएम नेता महेश ने कई गंभीर आरोप लगाया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि बजाबते हर काम के लिए एक लिस्ट ही टांग दो।मसलन दाखिल खारिज के लिए कितना और परिमार्जन के लिए क्या? वगैरह वगैरह जिससे भागदौड़ और परेशानी से बचा जा सके और यह तय हो सके कि पैसा फेको और मजा लो। उनका एक आरोप ये भी कि अंचलाधिकारी कार्यालय में बैठते ही नही, मीटिंग के नाम पर अपने आवास में आराम फरमा रहे होते हैं और आम आवाम दिन भर बिना खाए पिए कार्यालय का चक्कर लगा फिर अपने झोपड़ी में चले जाते हैं। महीनो चक्कर काटने के बाद अंततः ये भान होता है कि चढ़ावा भी देना भूल गया और फिर सिस्टम का शिकार हो जाता है। क्या मजाल कि आप अपने जरूरी काम से आप अंचलाधिकारी और कर्मचारी को फोन करे और बातचीत हो जाए। अंचलकर्मी से पूछे जाने पर हर बार यही सुनने को मिलेगा कि सर मीटिंग में है। एक पीड़ित ने तो ये कहा कि मीटिंग की ऑफिशियल रूटीन चेक किया जाय तो पता चलेगा की अधिकतर समय आवास में ही रहकर कार्यालय चलाते हैं जहां आम लोग जाने की हिमाकत नही कर सकते। ये शिकायत केवल रामानंद जैसे कमजोर व्यक्ति की नही है अपितु सैकड़ों लोगो की ओर से है। कमोबेश प्रखंड के सभी विभाग इस बीमारी से त्रस्त है। इससे निजात पाने के लिए सिर्फ देवतातुल्य ईमानदार अधिकारियों के अवतरण का है। यदपि आक्रोषपूर्ण नारेबाजी से घबराकर संबंधित अंचलाधिकारी आनन फानन में कार्यालय पहुंचकर धरना पर बैठे महेश कुमार और उनके समर्थको को समझा बुझाकर 1-2 दिनों में समाधान करने का ठोस आश्वासन दिया।

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