गैस सिलेंडर ब्लास्ट में नब्बे वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत
गैस सिलेंडर ब्लास्ट में नब्बे वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत

जे टी न्यूज़, विभूतिपुर ( विनय कुमार रॉय): विभूतिपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर दक्षिण पंचायत के वार्ड संख्या 13 में बीते रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें 85 वर्षीय वृद्धा राधा देवी की गैस सिलेंडर ब्लास्ट से मौत हो गई। जिस समय यह हादसा हुआ, वे अकेले खाना बना रही थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिलेंडर में पहले से गैस लीक हो रहा था, जैसे ही उन्होंने माचिस की तीली जलाई, आग की लपटों ने उन्हें अपने चपेट में ले लिया। रात करीब 8 बजे खाना बनाते समय अचानक हुए विस्फोट से पूरा घर जलकर राख हो गया।

धमाके की आवाज दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। जब तक दमकल की गाड़ी पहुंची, ग्रामीणों ने मिलकर आग पर काबू पा लिया। गंभीर रूप से झुलसी राधा देवी को आनन-फानन में दलसिंहसराय के एक निजी क्लिनिक ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया। लेकिन इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका 90% शरीर जल चुका था, जिससे बचाना संभव नहीं था। विडंबना देखिए कि परिवार के नौकदीशुदा सदस्ययो के होते हुए भी निर्वासित जीवन जी रही थी। राधा देवी के पति स्व. रामविलास महतो की मृत्यु करीब 25 साल पहले हार्ट अटैक से हो गई थी। उनके चार बेटे जयनाथ कुमार, श्रीराम कुमार, जितेंद्र कुमार और हरिहर कुमार और एक बेटी (टूना देवी) हैं। इसके अलावा, उनके तीन पोते (सर्वजीत कुमार, दयानंद कुमार, राहुल कुमार) भारतीय सेना में सेवारत हैं और एक पोती बिहार पुलिस में कार्यरत है।

इतना बड़ा नौकड़ीशुदा संगठित परिवार होने के बावजूद राधा देवी अकेले रहने और खुद के लिए खाना बनाने को मजबूर थीं। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: स्थानीय लोगों का कहना है कि राधा देवी एक व्यवहारिक और मिलनसार महिला थीं। वे आसपास के लोगों से घुल-मिलकर रहती थीं, लेकिन उनके अपने ही उनकी उचित देखभाल नहीं कर पाए। घटना की जानकारी मिलते ही बेटा-बेटी, पोते-पोतियां, नाती मौके पर पहुंचे, लेकिन अब पछताने के अलावा उनके पास कुछ नहीं बचा। परिवार के सभी सदस्य बिलख-बिलख कर रो रहे हैं, लेकिन यह सवाल अपनी जगह बना हुआ है—”एक मां अपने पांच बच्चों को पाल सकती है, लेकिन क्या वही बच्चे मिलकर अपनी मां की देखभाल नहीं कर सकते?”
समाज के लिए सबक: राधा देवी की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। यह घटना बताती है कि बुजुर्गों की देखभाल केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। यदि उनके परिवार के लोग उनके साथ रहते या उनकी देखभाल करते, तो शायद यह घटना टल सकती थी।


