एलएनएमयू में डॉ. आंबेडकर पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

देश-विदेश के विद्वानों की सहभागिता, सामाजिक न्याय व समानता पर हुआ सारगर्भित विमर्श

एलएनएमयू में डॉ. आंबेडकर पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

देश-विदेश के विद्वानों की सहभागिता, सामाजिक न्याय व समानता पर हुआ सारगर्भित विमर्श

जे टी न्यूज, दरभंगा:

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की 134वीं जयंती के अवसर पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हाइब्रिड मोड में आयोजित हुई, जिसमें देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों ने अपनी सहभागिता देकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अजय कुमार पंडित, डॉ. बी.आर. आंबेडकर चेयर के संरक्षक प्रो. अनिल कुमार झा, सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. शाहिद हसन, ए.एन. कॉलेज पटना के डॉ. संजय कुमार तथा इईआईपीए बिहार शाखा के सचिव डॉ. आर.के. वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। *अंतरराष्ट्रीय सहभागिता*- संगोष्ठी में ऑनलाइन माध्यम से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से डॉ. सतीश कुमार, बेरहमपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा से प्रो. विष्णु चरण चौधरी एवं अमेरिका के जॉर्जिया विश्वविद्यालय से ओलिविया औरब्रिट ने विचार प्रस्तुत किए।

*विमोचन कार्यक्रम*- कार्यक्रम के दौरान कुलपति एवं शिक्षाविदों द्वारा त्रैमासिक शोध पत्रिका *‘ज्ञानलोक’* एवं पुस्तक ‘*भारत रत्न जननायक कर्पूरी की समाजवादी दृष्टि में विकसित बिहार*’ का विमोचन किया गया।

*वक्ताओं के प्रमुख विचार*- कुलपति प्रो. चौधरी ने कहा कि आरक्षण का लाभ केवल कुछ वर्गों या परिवारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के वंचित तबके को मुख्यधारा से जोड़ना चाहिए। विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने बिहार में और विश्वविद्यालयों की स्थापना कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। प्रो. सतीश कुमार ने कहा कि डॉ. आंबेडकर सामाजिक समानता और न्याय के प्रतीक हैं। प्रो. अनिल कुमार झा ने सामाजिक एकता और समरसता पर बल दिया। प्रो. आर.के. वर्मा ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के विचारों को समाज के प्रभावशाली वर्ग द्वारा वह मान्यता नहीं मिली, जिसके वे अधिकारी थे। डॉ. संजय कुमार ने विविध विचारों में सामंजस्य स्थापित कर समतामूलक समाज निर्माण की आवश्यकता बताई। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक सह यू आर कॉलेज, रोसड़ा के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ घनश्याम राय ने सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना पर जोर दिया। प्रो. शाहिद हसन ने कहा कि शिक्षा और सामाजिक चेतना, सामाजिक पुनर्निर्माण की आधारशिला हैं। डॉ. भारती सेहता (बिहार विश्वविद्यालय) ने भी विचार व्यक्त किए।

*संगोष्ठी में सहभागिता*- कार्यक्रम का संचालन प्रो. मुकुल बिहारी वर्मा ने किया। तकनीकी सत्र की समाप्ति की घोषणा पूर्व छात्र नीतीश नायक ने विभागाध्यक्ष के निर्देश पर की। इस अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. रघुवीर कुमार रंजन, डॉ. दिव्या झा (सी.एम. कॉलेज), डॉ. गंगेश कुमार झा, डॉ. अविनाश कुमार सहित कई शिक्षक, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। डॉ. मनोज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों व प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. रामनाथ शर्मा, प्रदीप कुमार, सिद्धार्थ राज, केशव कुमार चौधरी, राम कृपाल, रुपेश कुमार यादव, डिंपी कुमारी, अंकु कुमारी, साहिल सहित अनेक छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

यह संगोष्ठी डॉ. आंबेडकर के विचारों को वर्तमान संदर्भ में पुनः समझने और सामाजिक न्याय, समानता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने की दिशा में एक सफल और सार्थक प्रयास साबित हुई।

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