उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की जीत पर हाजी शकील सैफी ने चढ़ाई शुकराने की चादर

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की जीत पर हाजी शकील सैफी ने चढ़ाई शुकराने की चादर

जे टी न्यूज, अजमेर :
भारत के 15वें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की शानदार जीत के बाद अजमेर शरीफ दरगाह पर शुकराने की चादर चढ़ाई गई। यह ऐतिहासिक पहल की कमान संभाली वर्ल्ड पीस हार्मनी के चेयरमैन हाजी शकील सैफी ने। उनके नेतृत्व में पूरा दल दरगाह शरीफ पहुंचा और नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति की ओर से चादर पेश कर देश की खुशहाली और एकता की दुआ मांगी।

*हाजी शकील सैफी का संदेश*

चादरपोशी के बाद मीडिया से बातचीत में सैफी ने कहा—

“सीपी राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक विश्वास और विकास की नई शुरुआत है। यह केवल व्यक्तिगत विजय नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की जीत है।”

उन्होंने आगे कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह हमेशा अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देती आई है। ऐसे में यहां से दुआ मांगना नए भारत के लिए शुभ संकेत है।

*सज्जादानशीन काउंसिल का स्वागत*

चादर चढ़ाने के बाद सैफी और उनके साथियों का काफिला ऑल इंडिया सज्जादानशीन काउंसिल पहुंचा, जहां चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने उनका स्वागत किया।


चिश्ती ने कहा—
“राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना भारत के लिए गर्व का क्षण है। उनका अनुभव और विचारधारा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगी।”

उन्होंने ख्वाजा साहब की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत को सबसे ज्यादा जरूरत प्रेम, सौहार्द और राष्ट्रीय एकजुटता की है।

*राजनीतिक और सामाजिक महत्व*

अजमेर शरीफ की यह चादरपोशी महज धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सियासी और सामाजिक संकेत भी है। चुनावी माहौल में यह कार्यक्रम देश की जनता को यह संदेश देता है कि मजहब और मजलिस से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित ही सर्वोपरि है।
हाजी शकील सैफी का यह कदम उनके सामाजिक–धार्मिक नेतृत्व को और मजबूत करता है और मुस्लिम समाज की ओर से नए उपराष्ट्रपति के लिए समर्थन का प्रतीक भी माना जा रहा है।

अजमेर शरीफ से उठी यह दुआ और हाजी शकील सैफी का नेतृत्व एक बार फिर याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है। जब राजनीति और अध्यात्म मिलते हैं, तो संदेश सिर्फ चुनावी सीमाओं में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है।

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