जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डा. विशाल कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित

जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डा. विशाल कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित

जे टी न्यूज, समस्तीपुर :

जिला में एचआईवी की रोकथाम के लिए महिला यौनकर्मी, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष, नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाने वाले लोग, हिजडा /ट्रांसजेंडर लोग महिला यौन कर्मी के ग्राहक के सर्वेक्षण के लिए p-MPSE के तहत गठित समुदाय सलाहकार समिति की द्वितीय बैठक बीजीजेएएस के सहयोग से संचारी रोग पदाधिकारी सह जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डा. विशाल कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए डॉक्टर कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNAIDS ने एचआईवी एड्स महामारी बहुल क्षेत्रो में सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और प्रतिक्रिया (Public Health Surveillance & Response) के तहत उच्च जोखिम समुदाय की संख्या का अनुमान लगाने की अनुशंसा की है। ये अनुमान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे नीति निर्माण, संसाधन वितरण और विशिष्ट समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं को संबोधित करने वाले हस्तक्षेपों के विकास में मददगार होगे। बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति के कार्यपालक निदेशक इं कौशलेंद्र कुमार ने संबोधित करते हुए कहा कि अब तक 67 हॉटस्पॉट की पहचान एवं एचआरजी की संख्या का आकलन किया जा चुका है। दिसंबर माह के अंत तक समस्तीपुर जिला के सभी 20 प्रखंडों के अंतर्गत सभी हॉटस्पॉट को चिन्हित कर लिया जाएगा। राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियत्रण कार्यक्रम (NACP) के तहत भारत में महिला यौनकर्मी, पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुष, नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाने वाले लोग, हिजडा /ट्रांसजेंडर लोग और यौनकर्मियों के ग्राहक एचआईवी/एड्स के लिए उच्च जोखिम समूह माने जाते हैं। राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), भारत सरकार, नई दिल्ली ने जिला/उप-जिला स्तरों पर उच्च जोखिम समुदाय के आकार के अनुमानों को समय-समय पर अद्यतन करने के लिए Programmatic Mapping and Population Size Estimation (p-MPSE) पद्धति को अपनाया है। जिला एड्स नियंत्रण एवं बचाव इकाई के डीपीएम सोनिक प्रकाश ने कहा कि PMPSE एक स्थायी, व्यवस्थित दृष्टिकोण है, जिसे उन स्थानों लोगों को मैप करने के लिए तैयार किया गया है जहा जिनके साथ उच्च जोखिम समुदाय एकत्रित होती है, जिसे हम हॉटस्पॉट भी कहते हैं। प्रत्येक हॉटस्पॉट नेटवर्क ऑपरेटर पर उनकी संख्या का अनुमान लगाने के लिए वैश्विक स्तर पर, PMPSE को प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए अनुशंसित किया गया है। कैब की बैठक को संबोधित करते हुए डीपीएम कटिहार ने कहा कि भारत में वर्ष 2020 और 2022 के बीच 651 जिलों में PMPSE का अपना प्रथम चरण आयोजित किया, जिससे देश में उच्च जोखिम समुदाय के आकारों की जानकारी उपलब्ध हो पायी और कार्यक्रम के प्रभावी क्रियावन्यन में मदद मिली। बिहार राज्यएन जी ओ संघ के सचिव एडवोकेट डॉ संजय कुमार बबलू ने एचआईवी की रोकथाम के लिए इसे एक दूरगामी प्रभाव वाला कार्यक्रम बताया। उच्च जोखिम समूह के बीच उनकी संख्या एवं क्षेत्र के आकलन के पश्चात एचआईवी नियंत्रण में काफी सुविधा होगी।कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बिहार ग्रामीण जागरूकता अभियान समिति की परामर्शी विशाखा कुमारी ने बताया कि 2 माह के अंदर जिला के अंदर हॉटस्पॉट का आकलन एवं संभावित उच्च जोखिम समूहों की संख्या का पता लगाया जाएगा। संस्था सुपौल , सहरसा बेगूसराय एवं समस्तीपुर जिला में उक्त कार्य संचालित कर रही है। बैठक में एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया।
राष्ट्रीय एड्स नियत्रण संगठन (NACO), भारत सरकार, नई दिल्ली ‌द्वारा PMPSE का दूसरा चरण अब लागू किया जा रहा है, जिसमें देश भर के लगभग 700 जिले जिले शामिल हैं। विदित हो कि यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है और इसका कार्यान्वयन बिहार के सभी 38 जिलों में किया जाना है। राज्य में इस कार्यक्रम के सफल एवं प्रभावी कार्यान्वयन हेतु p-MPSE कार्यक्रम का क्रियान्वयन एचआईवी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के द्वारा किया जा रहा है।बैठक में एसटीडी परामर्शी रंजीत कुमार, डी आई एस प्रकाश कुमार, समेत अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

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