सेवानिवृत्ति के वेला पर डॉ. चंदन ठाकुर की ओर से विशेष आलेख:-*
सेवानिवृत्ति के वेला पर डॉ. चंदन ठाकुर की ओर से विशेष आलेख:-*
जे टी न्यूज

जी हाँ यकीनन एक ऐसा नाम जो दरभंगा की फिजाओं में शैक्षणिक, राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों में दशकों से गुंजायमान हो, जिनकी गिनती सुलझे हुए हस्तियों में शुमार हो, हरदिल अजीज में जिनका अपना एक खासा स्थान हो, जनकल्याण की भावना जिनमें कूट-कूट कर भरी हो, कार्यप्रणाली ऐसी कि घंटों के कामों को मिनटों में खत्म करने का जो जादुई कला में दक्ष हो, धैर्य ऐसा कि उनके चेहरे पर सदैव सकूनता की अविरलता बहती हो, शालीनता, सहजता व स्माइलिंग ऐसा कि जो एक बार उनसे मिल लें, उनके दिलों पर वो गहरा छाप छोड़ जाते हों, अनुभव ऐसा कि बचपन से पचपन के बीच का हर व्यक्ति में फिट बैठ जेनरेशन गैप के खाई को पाट देतें हो। जो सौ ताला के एक मास्टर चाभी के रूप में क्षेत्र में प्रसिद्धि में स्थापित हों। वो कोई और नहीं महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय के भौतिकी विभागाध्यक्ष सह उत्तर बिहार के एकमात्र भरोसेमंद स्वामी विवेकानंद कैंसर अस्पताल, मब्बी, दरभंगा के संस्थापक निदेशक डॉ. शम्से आलम हैं।*
डॉ. शम्से आलम का जन्म सन 3 नवंबर 1960 ई. को दरभंगा जिला के किरतपुर प्रखंड के जमालपुर थाना अंतर्गत कोसी व कमला के मुख्य धारा के बीच सुदूर झगरुआ पंचायत-गाँव में हुआ था। सुदूर ग्रामीण परिवेश में जन्मे डॉ. आलम के पिता महमूद आलम एक सामान्य किसान व माता अख्तरी बेगम एक गृहणी थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय झगरुआ, माध्यमिक शिक्षा मध्य विद्यालय जमालपुर से हुई। तत्पश्चात वो शहर ले सफी मुस्लिम उच्च विद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक उत्तीर्ण किया। उच्च शिक्षा का आगाज मिल्लत महाविद्यालय, लहेरियासराय से किया, जहां इंटर की डिग्री विज्ञान संकाय से प्रथम श्रेणी में प्राप्त कर स्नातक की पढ़ाई के लिये शहर के प्रतिष्ठित महाविद्यालय, चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय, दरभंगा में दाखिला लिया और सत्र 1978-1980 बैच में भौतिकी विषय में प्रथम श्रेणी से प्रतिष्ठित हुए। तदोपरांत 1980-1982 बैच में विश्वविद्यालय भौतिकी विभाग से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। “The Role of impurities in host matrix system” विषय पर शोध पर्यवेक्षक तत्कालीन विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ. आर. एम. राय के मार्गदर्शन में पीएच.डी. की उपाधि से नवाजे गये। तत्पश्चात इनके प्रतिभा को नव आयाम मिला और ये सन 1985 ई. में बतौर सहायक प्राध्यापक झुमक महासेठ डॉ. धर्मप्रिय लाल महिला महाविद्यालय, मधुबनी में नियुक्त हुए। इस दौरान सन 1995-2001 तक तकरीबन 7 साल मिल्लत महाविद्यालय, लहेरियासराय में व 2020-2025 तक तकरीबन 6 साल महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय में बतौर भौतिकी विभागाध्यक्ष अपनी सेवा प्रदान की।*
इनके राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालें तो तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सह घनश्यामपुर विधायक डॉ. महावीर प्रसाद के राइट हैंड माने जाते थे। क्षेत्र के लोगों की मानें तो डॉ. आलम, डॉ. प्रसाद के राजनीतिक सलाहकार, चुनावी रणनीतिकार व चुनाव अभिकर्ता के रूप में क्षेत्र में प्रसिद्ध थे।*
सामाजिक सरोकारिता से इनके हृदय से लगाव का कहना ही क्या, सन 1999 ई. में स्थापित श्री रामकृष्ण सेवा ट्रस्ट के ये संस्थापक चेयरमैन, सन 2008 ई. में स्थापित शहर के प्रसिद्ध गीता माल्यूकुलर डायग्नोस्टिक लैब प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक निदेशक व उत्तर बिहार के एकमात्र भरोसेमंद स्वामी विवेकानंद कैंसर अस्पताल, मब्बी, दरभंगा के संस्थापक निदेशक हैं।*
इस बाबत जब हमारे संवाददाता ने डॉ. आलम से संपर्क साधा और उनसे सेवानिवृत्ति बाद का प्लान पूछा तो उन्होंने कहा कि अब फूल टाइम कैंसर रोगियों के बीच बीतेगी। कैंसर रोगियों का सेवा करना ही अब एकमात्र मेरा उद्देश्य है। अब मेरा शेष जीवन अपने परिवार व कैंसर पीड़ित रोगियों को समर्पित है। आगे उन्होंने कहा कि सुविधा व पैसे के अभाव में सामान्यतया लोग कैंसर के इलाज के लिये बड़े शहर नहीं जा पाते थे और असमय काल के गाल में समा जाते थे। अब दरभंगा जैसे छोटे शहरों ने भी यह मिथक तोड़ दिया है कि कैंसर के इलाज के लिये बड़े शहरों की ओर जाना पड़े। अब कैंसर मरीजों के इलाज की सारी सुविधा कम पैसे में आयुष्मान कार्ड पर स्वामी विवेकानंद कैंसर अस्पताल, दरभंगा में उपलब्ध है और आपको कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है।*
*ऐसे महान शिक्षक, सामाजिक सरोकारिता का भाव रखनेवाले डॉ. आलम का आज सेवानिवृत्ति होना अखरता है कि सच कहें तो जिनके साथ हमलोगों ने हर पल को जीया है और आगे हर पल को मिस करेंगे। वो आज हमलोगों के बीच से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस रुखसत के गमगीन वेला पर उन्हें सफल शैक्षणिक जीवन की बधाई, शुभकामनाएं व मंगलकामनाएं प्रेषित करते हैं और परवरदिगार मौला से उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु जीवन की इबादत करते हैं कि सदैव उनपर अपना अता बरसाते रहें।*




