वीरता, खेल और समाजसेवा के लिए बीस बच्चे बाल राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत है – हेमलता म्हस्के
वीरता, खेल और समाजसेवा के लिए बीस बच्चे बाल राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत है – हेमलता म्हस्के

जे टी न्यूज, दिल्ली:
वीर बाल दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से पुरस्कृत किया।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। यह पुरस्कार वीरता,कला के साथ संस्कृति,पर्यावरण,सामाजिक सेवा,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्रों में असाधारण उत्कृष्टता के लिए प्रदान किया जाता है। पहले भारत सरकार की ओर से हर साल पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर को देश के बहादुर बच्चों को पुरस्कृत किया जाता था। अब यह पुरस्कार हर साल 26 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह के चार बेटों के बलिदान की स्मृति में दिया जाता है। 26 दिसंबर को मुगलों की सेना ने गुरु गोविंद सिंह के चार बेटों की हत्या कर दी थी।
इस बार खेल के क्षेत्र में सबसे अधिक नौ बच्चे पुरस्कृत किए गए, जिनमें बिहार के वैभव सूर्यवंशी( 14), छत्तीसगढ़ की योगिता मंडावी (14), झारखंड की अनुष्का कुमारी (14), हरियाणा की ज्योति( 17), तेलंगाना के विश्वनाथ कार्तिकेय (16), कर्नाटक की धी निधि देसिंधु (16), गुजरात की बाका लक्ष्मी(17), आंध्र प्रदेश की शिवानी(17) और ओडिशा की जोशना सावर (15) के नाम शामिल है।इनके अलावा बहादुरी के लिए पुरस्कृत होने वालों में तमिलनाडु की 9 साल की व्योमा प्रिया और बिहार के 11 साल के कमलेश कुमार को दूसरों की जान बचाने में अपनी जान कुर्बान करने के लिए पुरस्कृत किया गया। व्योमा ने छह साल के बच्चे को बिजली के करंट से बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी जबकि बिहार के कैमूर जिले के जयपुर गांव में कमलेश कुमार दुर्गावती नदी में स्नान करने के दौरान डूब रहे बच्चों को बचाने में खुद बह गए थे । उनका शव 48 घंटे बाद 15 किलोमीटर दूर नदी किनारे मिला। इन दोनों को निस्वार्थ साहस और बलिदान के उदाहरण बनने के लिए मरणोपरांत पुरस्कृत किया गया। वीरता के लिए अन्य पुरस्कृत बच्चों में केरल के मोहम्मद सिद्दान (11) हैं। उन्होंने अपने हमउम्र दो बच्चों को बिजली के झटके से लकड़ी का इस्तेमाल कर बचाने का साहस दिखाया। इसी तरह आगरा उत्तर प्रदेश के 9 साल के अजय राज ने अपने गांव की नदी के पास मगरमच्छ के हमले में पिता की जान बचाकर असाधारण साहस का परिचय दिया । जब एक मगरमच्छ उनके पिता के पैर को जकड़ कर गहरे पानी में खींचने की कोशिश कर रहा था तो वे मगरमच्छ पर तब तक डंडे से वार करते रहे जब तक उनके पिता को उसने छोड़ नहीं दिया। इसी तरह महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर के 17 साल के अर्णव
अनुप्रिया महर्षि और जोरहाट असम की 14 साल की आईसी प्रिया बोहरा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए पुरस्कृत किए गए। अर्णव एक सड़क दुर्घटना में अपने दाहिने हाथ के लकवा ग्रस्त होने के बावजूद विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों के रूप में बदल दिया। उन्होंने फेयर चांस विकसित किया। जो ए आई
आधारित हाथ के लकवा को ठीक करने का उपकरण है। जबकि आई सी प्रिया को प्राकृतिक खेती और अखबारों के कचरे से पेंसिल बनाने की मशीन विकसित करने के लिए पुरस्कृत किया गया।
इनके साथ उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की 17 साल की पूजा को पर्यावरण के लिए पुरस्कृत किया गया। उन्होंने गेहूं की कटाई करने वाली मशीनों से होने वाले कृषि वायु प्रदूषण को कम करने वाली एक मशीन विकसित की है । इनके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैनिकों तक चाय दूध पहुंचाने वाले 10 साल के श्रवण सिंह को और चंडीगढ़ के 17 साल के अनाथ बालक वंश तायल को दिव्यांग बच्चों की सेवा करने के लिए समाज सेवा के क्षेत्र में राष्ट्रपति मुर्मू ने पुरस्कृत किया। कला और संस्कृति के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने वाले पश्चिम बंगाल नदिया के 16 वर्ष के सुमन सरकार और मिजोरम की एस्थर
लाल दुहोनी मना मोटे को पुरस्कृत किया गया। सुमन सरकार ने संगीत में 13 वर्षों से अधिक का प्रशिक्षण लिया है ।62 से अधिक बार प्रस्तुति दी है । 22 प्रथम पुरस्कार सहित 43 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं। जबकि मनामोटे ने देशभक्ति गीतों के लिए दुनिया भर के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उनके गानों को यूट्यूब पर 2 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है इनके 11 लाख सब्सक्राइबर हैं। इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में दिल्ली में आयोजित अष्ट लक्ष्मी महोत्सव के उद्घाटन समारोह में भी अपनी खास प्रस्तुति दी है।

