डॉ. ललित नारायण मिश्र का संदेश— युवा ही राष्ट्र की असली ताकत

राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस पर विवेकानंद विचारों की गूंज

डॉ. ललित नारायण मिश्र का संदेश— युवा ही राष्ट्र की असली ताकत

राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस पर विवेकानंद विचारों की गूंज

 

जे टी न्यूज, सहरसा:
राजेंद्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस पूरे गरिमा और प्रेरणादायी वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई-1 एवं इकाई-2 द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. ललित नारायण मिश्र ने की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस केवल स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि युवाओं को दिशा देने वाला संकल्प-दिवस है। उन्होंने 1893 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण ने भारत को विश्व मंच पर आत्मगौरव और आत्मविश्वास के साथ स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि आज जब भारत अमृतकाल के दौर से गुजर रहा है, तब विवेकानंद के विचार युवाओं को चरित्र, साहस और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
एनएसएस इकाई-1 के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. इंद्रकांत झा ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस भारत के आत्मबल और आत्मविश्वास का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि आज का युवा केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, नैतिक और जिम्मेदार नागरिक बन रहा है या नहीं।
एनएसएस इकाई-2 के कार्यक्रम पदाधिकारी एवं सेहत केंद्र नोडल पदाधिकारी डॉ. अमिष कुमार ने बताया कि 12 जनवरी 1984 से राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने विवेकानंद के अमर संदेश—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए”—को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा पांडे ने कहा कि आज के युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार, नवाचार, मानसिक दृढ़ता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसी चुनौतियां हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं को सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस देता है।
समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. कविता कुमारी ने कहा कि डिजिटल युग में युवा दिवस हमें यह सिखाता है कि सफलता सुविधा से नहीं, संघर्ष और अनुशासन से मिलती है। उन्होंने कहा कि युवा दिवस आत्मकेंद्रित सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रकेंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करता है।
कार्यक्रम में डॉ. अक्षय कुमार चौधरी ने विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि वे निर्भीकता के प्रबल समर्थक थे। उनका मानना था— “यदि आप जीतेंगे तो नेतृत्व करेंगे और यदि हारेंगे तो मार्गदर्शन करेंगे।”


कार्यक्रम का संचालन डॉ. अक्षय कुमार चौधरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस इकाई-1 के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. इंद्रकांत झा ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. राजीव झा, डॉ. आशुतोष कुमार झा, डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. कुमारी अपर्णा, डॉ. रामानंद रमन, डॉ. संजय कुमार, डॉ. मंसूर आलम, डॉ. निर्मल कुमार, डॉ. गोपाल साह, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. भगवती प्रसाद, डॉ. आलोक कुमार झा, डॉ. निशित रंजन, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. संजय परमार, डॉ. रूद्र किंकर वर्मा, डॉ. पंकज कुमार यादव, डॉ. आनंद कुमार मिश्र, डॉ. आलोक कुमार मिश्रा, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. प्रियदर्शनी, डॉ. सौरभ पांडे, डॉ. पिंकी कुमारी, प्रशाखा पदाधिकारी नंद किशोर झा, शिवम कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और एनएसएस स्वयंसेवक मौजूद रहे।

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