हिन्दी भाषा को विश्व मंच पर लाने हेतु अंतरराष्ट्रीय आभासी विचार गोष्ठी का सफल आयोजन
आभासी संगोष्ठी में प्रवासी भारतीयों व विदेशी हिंदी प्रेमियों ने व्यक्त किए भावनात्मक विचार
आभासी संगोष्ठी में प्रवासी भारतीयों व विदेशी हिंदी प्रेमियों ने व्यक्त किए भावनात्मक विचार
हिन्दी भाषा को विश्व मंच पर लाने हेतु अंतरराष्ट्रीय आभासी विचार गोष्ठी का सफल आयोजन

जे टी न्यूज, नई दिल्ली/लखनऊ :
विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आभासी विचार गोष्ठी में भाग लेने वाले प्रवासी भारतीयों और विदेशी हिन्दी प्रेमियों ने हिन्दी के प्रति अपना गहरा प्रेम और गर्व व्यक्त किया।
संगोष्ठी में कई वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी बहुत ही सुंदर भाषा है, यह हमारा धन, हमारी संस्कृति, हमारे पूर्वजों की भाषा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी सीखकर भारत को बेहतर समझना चाहते हैं और यह भाषा उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ती है।
भाषा के वैश्विक प्रचार‑प्रसार पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दी एक संपूर्ण भाषा है, भारत की बहुत पुरानी भाषा है और हिन्दी फिल्मों व संगीत ने इसको विश्व स्तर पर पहुँचाया है। संगीत, सिनेमा और खेल‑खेल में हिन्दी सीखने के अनुभव को भी सराहा गया। वक्ताओं ने कहा कि हर किसी को एक नई भाषा सीखनी चाहिए और हिन्दी भाषा का विश्व में प्रचार‑प्रसार करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत को जानने की कड़ी है, जिसकी महिमा अनंत है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी ने हिन्दी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में भी इस भाषा के विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
आपको बता दें कि भारतीय विद्या संस्थान एवं विश्व हिन्दी परिषद ने विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आज एक अंतरराष्ट्रीय आभासी विचार गोष्ठी आयोजन किया गया। गोष्ठी में कनाडा, अमेरिका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, गयाना तथा भारत के हिन्दी प्रेमियों ने सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री डी. पी. मिश्रा तथा डॉ. नन्दकिशोर साह उपस्थित रहे। भारतीय विद्या संस्थान के डायरेक्टर जनरल डॉ. विवेक शंकर आदेश ने अध्यक्षता की, जबकि संचालन संस्थान की महासचिव एवं विश्व हिन्दी परिषद, अमेरिका की महामंत्री डॉ. कादंबरी शंकर आदेश ने किया।
शुभारंभ मंत्रोच्चार एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत वक्तव्य भारतीय विद्या संस्थान के प्रेसिडेंट श्री तेनसिंग ने दिया और अंत में पंडित रिकी ने सभी का धन्यवाद किया। गोष्ठी का विषय “हिन्दी भाषा का महत्व, विशेषताएँ और वैश्वीकरण” रहा।
वक्ताओं में श्री तेनसिंग, श्री रिकी, श्रीमती सविता, श्री आनंद, श्रीमती राधिका, कुमारी देविका, श्री संजय, डॉ. अजय, डॉ. अरुण, कुमारी अरिस्ता, श्रीमती अंजनी, श्रीमती धनराजी, श्री सोना, कुमारी पार्वती, डॉ. अम्बिका, कुमारी समीक्षा, कुमारी प्रगति और कुमारी नीहारिका शामिल थे। सभी ने हिन्दी के वैश्विक प्रासंगिकता, शिक्षण‑शैलियों और सांस्कृतिक प्रभाव पर अपने‑अपने अनुभव साझा किए।
विशिष्ट एवं मुख्य अतिथियों के वक्तव्यों के बाद “हिन्दी को विश्व भाषा कैसे बनायें” पर विस्तृत चर्चा हुई। विश्व हिन्दी परिषद का ध्येय गीत सभी ने सामूहिक रूप से गाया, जिसे खूब सराहना मिली। कार्यक्रम के अंत में विश्व हिन्दी परिषद के पदाधिकारियों ने “महाकवि हरि शंकर आदेश स्मृति सम्मान” की घोषणा की। डॉ. कादंबरी शंकर आदेश के दो गीत – “मैं हिन्दी” और “भारत मेरी धड़कन” – को श्रोताओं ने खूब पसंद किया।
अध्यक्ष डॉ. विवेक शंकर आदेश ने कहा, “हिन्दी को विश्व की भाषा बनाने के लिये संगीत, नाटक, फिल्म एवं अन्य रुचिकर माध्यमों का हिन्दी शिक्षण में अधिक उपयोग आवश्यक है। हिन्दी व अहिन्दी भाषी सभी को मिलकर इस दिशा में कार्य करना चाहिए।”
कार्यक्रम का समापन पंडित रिकी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। यह आभासी विचार गोष्ठी हिन्दी के वैश्विक प्रचार‑प्रसार में एक महत्वपूर्ण कदम बन गई और भविष्य में इसी प्रकार के सहयोगी आयोजनों की आशा जगी। कि संगोष्ठी में अंबिका ग्याना, संजय कनाडा, अमेरिका से कुमारी पार्वती, कुमारी समीक्षा, कुमारी प्रगति, कुमारी नीहारिका, त्रिनीडाड से राधिका, कुमारी देविका, कुमारी अरिस्ता, अंजनी, सोना भारत से विक्रमादित्य सिंह, अशोक कुमार भार्गव, संगीता सिंह बनाफर गोविंद चौधरी सहित बड़ी संख्या में हिंदी प्रेमियों ने अपने-अपने विचार रखें।


