*ललित बाबू की 104 वीं जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए किया श्रद्धा सुमन अर्पित*

*जमीनी स्तर पर काम करने वाले एवं हम सबके प्रेरक व्यक्तित्व ललित बाबू पर प्रतिवर्ष ललित चेयर प्रकाशित करें ग्रन्थ- कुलपति*

*ललित बाबू की 104 वीं जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए किया श्रद्धा सुमन अर्पित*

*जमीनी स्तर पर काम करने वाले एवं हम सबके प्रेरक व्यक्तित्व ललित बाबू पर प्रतिवर्ष ललित चेयर प्रकाशित करें ग्रन्थ- कुलपति*

*बचपन से मेधावी रहे ललित बाबू मानवीय मूल्ययुक्त महामानव, जिनमें मिथिला की शांति तथा कोसी की उग्रता विद्यमान- प्रो अनिल कुमार*

जे टी न्यूज़ । ललित बाबू विभिन्न पदों पर रहकर भारत एवं बिहार के साथ मिथिला के विकास के लिए काफी यादगार काम किया। उन्हें पूरे मिथिला समाज, बिहार तथा भारतवर्ष से काफी लगाव था। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग द्वारा संचालित ललित नारायण मिश्र चेयर एवं एनएसएस कोषांग के संयुक्त तत्त्वावधान में जुबिली हॉल में आयोजित ललित बाबू की 104 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। कुलपति ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले ललित बाबू हमारे प्रेरक हैं, जिनपर प्रतिवर्ष ललित नारायण मिश्र चेयर ग्रन्थ, स्मारिका या पत्रिका प्रकाशित करें, ताकि नई पीढ़ी के छात्र-छात्राओं को उनके द्वारा समाज, राज्य एवं राष्ट्र के लिए किए गए कार्यों की अधिक से अधिक जानकारी हो सके।
मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो अनिल कुमार झा ने कहा कि ललित बाबू बचपन से ही मेधावी एवं मानवीय मूल्यों से युक्त महामानव थे। ऐसे व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति का बिहार ही नहीं, पूरे देश में भी मिलना दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि उनमें दानशीलता की पराकाष्ठा, धर्म के प्रति आस्था तथा सभी के प्रति सहयोग की भावना थी। इसी कारण जो व्यक्ति ललित बाबू से एक बार मिल लेता था, वह सदा के लिए उन्हीं का हो जाता था।


वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो हरे कृष्ण सिंह ने कहा कि ललित बाबू जैसा व्यक्तित्व आज तक मिथिला में नहीं हुआ। उन्होंने मिथिला में रेलमार्गों के विकास की जो रूपरेखा तैयार की थी, इसी पर आज भी काम हो रहा है। विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि ललित बाबू मिथिला तथा बिहार के लोकप्रिय सपूत थे, जिनकी ख्याति देश-विदेश में प्रसिद्ध है।

कोसी पुत्र के रूप में ख्याति प्राप्त ललित बाबू जैसा व्यक्तित्व मिलना दुर्लभ है। सिंडिकेट सदस्य डॉ बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’ ने कहा कि ललित बाबू मिथिला के लाल, बिहार के नेता तथा विश्व शान्ति के प्रणेता थे। डॉ बैजू ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के प्रखर नेता बताते हुए ललित बाबू को भारतरत्न देने की मांग की। कुलसचिव डॉ दिव्या रानी हंसदा ने ललित बाबू को दूरदर्शी एवं समर्पित जननेता बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के विकास के लिए सदा प्रयासरत रहे। उनकी सोच थी कि बिना भेदभाव के सबको सुअवसर प्रदान कर ही समाज का समग्र विकास संभव है।
समारोह में वित्तीय परामर्शी इन्द्र कुमार, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक- शिक्षिकाएं, पदाधिकारी, कर्मचारी, पीजी के छात्र-छात्राएं एवं विभिन्न कॉलेजों से काफी संख्या में आए एनएसएस स्वयंसेवक एवं कार्यक्रम पदाधिकारी सहित 350 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे, जिन्हें सहभागिता प्रमाण पत्र दिया गया।


प्रारंभ में प्रशासनिक भवन के सामने स्थित ललित बाबू की प्रतिमा पर कुलपति के नेतृत्व में माल्यार्पण किया गया, जबकि जुबिली हॉल में आयोजित मुख्य समारोह का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं ललित बाबू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। तत्पश्चात कुलगीत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह का अंत राष्ट्रगान से हुआ। अतिथियों का स्वागत अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ अम्बरीश कुमार झा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस के विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया ने किया। अर्थशास्त्र की प्राध्यापिका डॉ शीला यादव के संचालन में आयोजित समारोह में अतिथियों का स्वागत पाग, चादर एवं बुके से किया गया।

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