किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन विभिन्न मांगों को लेकर जनता ने उठाई आवाज

किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन

विभिन्न मांगों को लेकर जनता ने उठाई आवाज

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: जितवारपुर में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में एक विशाल आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य किसान विरोधी कानूनों, संशोधित श्रम एवं बिजली कानूनों को रद्द करने, बढ़ते अपराध और बेतहाशा महंगाई पर रोक लगाने सहित अन्य महत्वपूर्ण मांगों को सरकार के सामने रखना था। प्रदर्शन का आयोजन समस्तीपुर अंचलाधिकारी और प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के कार्यालयों के बाहर किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के सचिव उपेन्द्र साय ने किया, जिन्होंने कहा कि आज देश में जनतंत्र नहीं बल्कि कुछ गिने-चुने पूंजीपतियों के इशारे पर सरकार चलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र और राज्य सरकारें तानाशाही रवैया अपना रही हैं, जिससे आम जनता त्रस्त हो चुकी है। साय ने कहा कि देश में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और सदनों की गरिमा को समाप्त कर अंबानी और अडानी जैसे पूंजीपतियों के दबाव में कानूनों में संशोधन किए जा रहे हैं। इसके चलते किसान, मजदूर और आम जनता सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने को मजबूर हो गई है।

प्रदर्शनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगों को रखते हुए कहा:

1. दाखिल-खारिज, परिमार्जन एवं जया जमाबन्दी में भ्रष्टाचार पर तुरंत रोक लगाई जाए।
2. पंचायत के अंतर्गत लोहिया स्वच्छता कर्मियों को ₹10,000 प्रति माह मानदेय दिया जाए।
3. 200 यूनिट तक बिजली बिल को फ्री किया जाए।
4. प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को बंद किया जाए।
5. प्रखण्ड और अंचल कार्यालयों की घेराबंदी अविलंब की जाए।
6. मखना परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों के रहने के लिए आवास की व्यवस्था की जाए।
7. लमूनिया रघुकंठ और भिड़ीटोल में पर्चाधारियों को उनके अधिकारों की गारंटी दी जाए।
8. सभी विधवा, वृद्धा और विकलांग व्यक्तियों को ₹3000 पेंशन देने की गारंटी की जाए।
9. जितवारपुर चौक नगर वार्ड-18 के धुनिया टोल में फैके गए कचरे की सफाई की जाए और कचरे के लिए बड़े डिब्बे की व्यवस्था की जाए।
10. वार्ड-11 और वार्ड-13 के नल-जल योजना के कनेक्शन की समस्या का समाधान किया जाए।
11. सभी भूमिहीन गरीबों को 5 डिसमिल जमीन और आवास देने की गारंटी की जाए।
12. मनरेगा के तहत मजदूरों को 200 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
13. सरकारी पोखरों पर बसे लोगों को विस्थापित करने से पहले नई जगह बसाने की व्यवस्था की जाए।
14. दलित बस्तियों में सड़क और नाला की सुविधा दी जाए।
15. सिविल अस्पताल में ₹2 का ऑनलाइन पर्चा कटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और घर तक दवाई पहुंचाने की गारंटी की जाए।
16. मोहनपुर वार्ड नंबर-43 में जल-बल योजना से पानी की समस्या का समाधान किया जाए।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आगे और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों और मजदूरों की नहीं, बल्कि देश के हर आम नागरिक की है, जिसे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।

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