शिक्षकों का मनोबल तोड़कर क्या दिखाना चाहते हैं एसीएस सिद्धार्थ – आरके राय, कहा हिम्मत है तो उच्च शिक्षा में व्याप्त गडबड़ी पर करें कार्रवाई
शिक्षकों का मनोबल तोड़कर क्या दिखाना चाहते हैं एसीएस सिद्धार्थ – आरके राय, कहा हिम्मत है तो उच्च शिक्षा में व्याप्त गडबड़ी पर करें कार्रवाई
जेटी न्यूज।


समस्तीपुर। बिहार के मुख्य शिक्षा आयुक्त एस सिद्धार्थ का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वे मध्याह्न भोजन और विद्यालय का संचालन देखते नजर आ रहे हैं। उनके इस कदम से विद्यालय के संचालन में या मध्याह्न भोजन में कितना सुधार होगा इसका तो पता नहीं, मगर वायरल वीडियो से यह तो स्पष्ट है कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए और शिक्षकों पर मानसिक रूप से अतिरिक्त दबाव डालने के लिए ड्रामा जरूर कर रहे हैं। अप्पन पार्टी राष्ट्रीय प्रधान महासचिव आरके राय ने एसी एस श्री सिद्धार्थ के कार्य शैली कौ निराशाजनक और शिक्षकों को हताश करने वाला बताते हुए उन्हें आडे हाथों लेते हुए कहा की सिरफिरे पदाधिकारी केके पाठक की तर्ज पर ही ये भी विद्यालयों में मुख्य रूप से मकान सहित बुनियादी सुविधाओं के अभाव को दूर करने की दिशा में कुछ करते नहीं दिख रहे, जहां न बच्चों के बैठने की व्यवस्था है, न शिक्षक के। एक एक कमरे में चार-चार, पांच-पांच कक्षायें संचालित करने से बच्चे क्या पढेंगे ये इनकी समझ में नहीं आता? इनके मातहत जिला शिक्षा पदाधिकारी के अधीनस्थ मध्याह्न भोजन पदाधिकारी 100 किलो में 70 किलो ही अनाज उपलब्ध कराते हैं। 80-90 रुपये लीटर सरसो तेल, 80 रूपये किलो अरहर की दाल, किस दुकान में मिलता है यह भी वे किसी को नहीं बताते हैं। ऐसी स्थिति में उनका यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पहले से ही प्रति दिन सरकार के नये नियम व प्रावधानों से त्रस्त शिक्षक केलिए हताश करने वाला कदम ही तो है। श्री राय ने कहा कि अपने उलूल जुलूल बेवकूफाना फरमानो से निरीह प्राइमरी शिक्षकों को परेशान करने वाले पदाधिकारी और मंत्री उच्च शिक्षा में व्याप्त व्यापक गड़बड़ियों पर सिर्फ उंगली रख कर तो दिखायें। बिहार के अंगीभूत महाविद्यालयों में उन शिक्षकों को भी एक लाख से डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं जिनके विषय में एक भी नामांकन नहीं है। यहां तक कि 70% हाजिरी के फर्जी अटेंडेंस महाविद्यालय विश्वविद्यालय तक देते हैं। इससे बड़ा शिक्षा विभाग में कोई घोटाला और भ्रष्टाचार कहीं नहीं होगा। मगर वे इस ओर कड़ा कदम उठाना तो छोड़िये इस तरफ आंख उठा कर देखने का भी दम नहीं है। अगर उनमें हिम्मत है तो राज्य के तमाम अंगीभूत महाविद्यालयों में एक नजर देखें। जहां तक राज सरकार से मान्यता प्राप्त संबद्ध महाविद्यालय हैं उन शिक्षकों और कर्मचारियों के मुख्यमंत्री द्वारा घोषित अनुदान 2017 से नहीं दिए जाने की दिशा में आपके द्वारा कौन सा कार्रवाई की जाएगी यह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके बतायें।


