कोसी अंचल की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र बना भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय में परिचर्चा व पुष्पांजलि कार्यक्रम, उपलब्धियों–चुनौतियों पर होगा मंथन

कोसी अंचल की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र बना भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय
भू.ना.मंडल विश्वविद्यालय में परिचर्चा व पुष्पांजलि कार्यक्रम, उपलब्धियों–चुनौतियों पर होगा मंथन

जे टी न्यूज़, मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू), लालूनगर, मधेपुरा आज अपने 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है। यह केवल एक विश्वविद्यालय की वर्षगांठ नहीं, बल्कि कोसी एवं सीमांचल क्षेत्र की उस शैक्षणिक यात्रा का उत्सव है, जिसने सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय विकास और उच्च शिक्षा के विस्तार को नई दिशा दी। स्थापना की पृष्ठभूमि : सामाजिक न्याय की सोच
बीएनएमयू की स्थापना 10 जनवरी 1992 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सरकार द्वारा की गई। यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि मंडल आयोग के प्रख्यात नेता भूपेंद्र नारायण मंडल की विचारधारा—समानता, अवसर और सामाजिक न्याय—का जीवंत प्रतीक है।
विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रो. रमेंद्र कुमार यादव ‘रवि’ ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा की नींव मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाई।
विस्तार से संकेंद्रण तक का सफर
स्थापना काल में बीएनएमयू का कार्यक्षेत्र कोसी एवं सीमांचल के सात जिलों तक फैला था। यह क्षेत्र लंबे समय तक शैक्षणिक रूप से उपेक्षित रहा। वर्ष 2018 में पूर्णिया विश्वविद्यालय के गठन के बाद बीएनएमयू का क्षेत्र मधेपुरा, सहरसा और सुपौल—तीन जिलों तक सीमित हुआ।
हालाँकि भौगोलिक क्षेत्र घटा, लेकिन शैक्षणिक जिम्मेदारियाँ और गुणवत्ता की अपेक्षाएँ और बढ़ीं।
शैक्षणिक उपलब्धियाँ
35 वर्षों की यात्रा में बीएनएमयू ने—हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ा,ग्रामीण व अर्ध-शहरी युवाओं को विश्वविद्यालयी मंच दिया
कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कीlएनएसएस, एनसीसी व विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक सरोकार को मजबूत कियाl
नया नेतृत्व, नई दिशा
25 जनवरी 2024 को विश्वविद्यालय के 27वें कुलपति प्रो.(डॉ.) बी. एस. झा ने पदभार ग्रहण किया। उनके कार्यकाल में
अकादमिक अनुशासन,परीक्षा प्रणाली में सुधार,प्रशासनिक पारदर्शिता,आधारभूत संरचना के विकास जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक पहल देखने को मिली है।

वर्तमान में प्रो. अशोक कुमार ठाकुर (तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय) बीएनएमयू के कुलसचिव के रूप में प्रशासनिक दायित्वों का कुशल निर्वहन कर रहे हैं।
चुनौतियाँ : जिनसे जूझना जरूरी
बीएनएमयू के सामने आज भी कई चुनौतियाँ हैं—
शिक्षकों की कमी
शोध एवं नवाचार के लिए सीमित संसाधन
डिजिटल एवं तकनीकी अधोसंरचना का विस्तार
राष्ट्रीय रैंकिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में स्थान बनाना
इन चुनौतियों को अवसर में बदलना ही विश्वविद्यालय की अगली यात्रा की कसौटी होगी।
संभावनाएँ : भविष्य की राह
नई शिक्षा नीति (NEP), डिजिटल लर्निंग, बहुविषयक पाठ्यक्रम, कौशल विकास और शोध आधारित शिक्षा बीएनएमयू के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलती हैं। यदि नीति, नेतृत्व और संसाधन का समन्वय सही दिशा में हुआ, तो बीएनएमयू कोसी क्षेत्र का ही नहीं, बल्कि बिहार का अग्रणी विश्वविद्यालय बन सकता है।
निष्कर्ष
35 वर्षों की यात्रा में बीएनएमयू ने संघर्ष, संकल्प और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। आज आवश्यकता है आत्ममंथन की—ताकि अतीत की विरासत को संजोते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ किया जा सके।
बीएनएमयू @35 केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत है।

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