जमानत से बदला सियासी माहौल: “यह न्याय नहीं, जनआवाज की जीत” प्रवक्ता राजेश यादव बोले— “साजिश बेनकाब, शोषितों की लड़ाई और तेज होगी”
जमानत से बदला सियासी माहौल: “यह न्याय नहीं, जनआवाज की जीत”
प्रवक्ता राजेश यादव बोले— “साजिश बेनकाब, शोषितों की लड़ाई और तेज होगी”

जे टी न्यूज, पूर्णिया:
सांसद पप्पू यादव को न्यायालय से जमानत मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने इसे “न्याय की जीत” बताते हुए कहा कि यह फैसला लाखों बेसहारा और बेजुबान लोगों की उम्मीदों की भी जीत है, जिनकी लड़ाई पप्पू यादव लंबे समय से निःस्वार्थ भाव से लड़ते रहे हैं।
प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि यह जमानत उन षड्यंत्रकारियों की हार का संकेत है, जो कथित तौर पर उन्हें सलाखों के पीछे रखना चाहते थे। “इस घटनाक्रम के बाद उनके इरादे और बुलंद हुए हैं और वे आगे भी शोषितों की आवाज मजबूती से उठाते रहेंगे,” उन्होंने कहा।

31 वर्ष पुराने मामले में आधी रात को हुई गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए राजेश यादव ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि जब चार महीने पहले ही कोर्ट से वारंट जारी हो चुका था, तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई। साथ ही पटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गंभीर अपराधों के आरोपियों को पकड़ने में नाकामी चिंता का विषय है।
प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बाद में अन्य मुकदमे जोड़कर जमानत प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यहां तक कहा कि परिस्थितियां यह संकेत देती हैं मानो पप्पू यादव के खिलाफ बड़ी साजिश रची जा रही हो।

जहानाबाद की बेटी को न्याय दिलाने के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लिया जाएगा। अंत में प्रवक्ता ने न्यायालय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस फैसले ने लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को और मजबूत किया है।

बिहार की सियासत में यह जमानत सिर्फ कानूनी राहत नहीं मानी जा रही, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है—कि जनसमर्थन और संघर्ष की राजनीति आज भी बड़े समीकरण बदलने की क्षमता रखती है। अब निगाहें इस पर हैं कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को किस नई दिशा में ले जाता है।



