स्कूलों में पहले बच्चों को सुरक्षा बाद में शिक्षा जेटी न्यूज डेस्क/ आनंद रमण बेगूसराय::- कोरोना के दौर में स्वास्थ्य के साथ-साथ सबसे अधिक कुप्रभाव बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। पिछले 4 माह से स्कूल कॉलेज के बंद रहने से छात्रों की पढ़ाई ठप है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि बच्चों को पहले कोरोना से सुरक्षा बाद में शिक्षा। इस हकीकत को कोई नकार नहीं सकता है। बिहार सरकार ने अगस्त में स्कूल कॉलेज खोलने के बाबत अभिभावकों से उनकी राय जानने के लिए एक सर्वे कार्यक्रम चलाया था। इस सर्वे में 92% अभिभावकों ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आगे स्कूल नहीं खोलने की अपनी राय दी है। ऐसी स्थिति में ऐसा लगता है कि अगस्त माह में भी स्कूल कॉलेज खुलने की संभावना क्षीण है। कोरोना से बचने के लिए बच्चों से लेकर शिक्षकों के बीच शारीरिक दूरी आवश्यक है और आज स्कूल संचालन की व्यवस्था में यह संभव नहीं लग रहा है। अलबत्ता नए सिरे से वर्ग संचालन की व्यवस्था की जाए तो कुछ हद तक यह संभव हो सकता है। वैसे अभिभावक कोरोना संक्रमण में कमी आने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विभाग ने बिहार के शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि अगस्त,सितंबर,अक्टूबर माह तक स्कूल खोलने के बाबत अभिभावकों से रायशुमारी करें। अभिभावकों के साथ बातचीत के दौरान सामने आए रायशुमारी के निष्कर्ष को बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक संजय कुमार सिंह के सूत्रों से जानकारी मिली कि अभिभावकों का मत है कि जब तक कोरोना संक्रमण में कमी नहीं आती है तब तक स्कूल नहीं खोला जाए। हां,स्कूलों में वर्ग संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्कूल में एक साल सभी बच्चे को नहीं बुलाया जाए। कक्षा चलाने और छुट्टी होने की अवधि कम किया जाए। स्कूल शिफ्ट में चलाया जा सकता है। इसके साथ ही 1 दिन के अंतराल पर अलग वर्गों के छात्रों को बुलाकर वर्ग संचालन किया जा सकता है। कक्षा को आधे-आधे बांट कर कई जगह बैठने की व्यवस्था की जा सकती है, बशर्ते कि स्कूल में अधिक जगह उपलब्ध हो।खुले परिसर में भी दूरी बनाकर बच्चों का वर्ग संचालन हो सकता है। इनके अलावा अनेक अभिभावकों ने सरकार को सलाह दी है कि स्कूल में शुद्ध पानी,साफ सफाई और हाइजीन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।वर्चुअल पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए भौतिक रूप से कक्षाओं में कटौती होनी चाहिए। शारीरिक दूरी को लेकर शिक्षकों एवं छात्रों को प्रशिक्षित करना आज वक्त की मांग है। साथ ही बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इसी कड़ी में बी.ई.पी.के एस. पी.ओ. रविशंकर सिंह ने कहा कि अभिभावकों की राय है कि केंद्र सरकार कोरोना काल में निजी स्कूलों की फीस से राहत देने के लिए फीस नियंत्रण अधिनियम बनाए और वह मध्य-मार्गी हो। सरकार ऐसी रेगुलेटरी लाए जिससे अभिभावकों का वित्तीय बोझ भी कम हो और स्कूल को भी खर्चा निकल आए ताकि शिक्षक और अन्य कर्मी को नियमित वेतन मिल सके। इसी क्रम में शिक्षाविद् सह दरभंगा स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद क्षेत्र प्रत्याशी इंजीनियर रामनंदन सिंह कहते हैं कोरोना महामारी की तीव्रता में कमी होने पर बड़े बच्चों का खासकर 9 ,10,11 और 12 के छात्रों का वर्ग संचालन सावधानी और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए शुरू किया जा सकता है कि जिस स्कूल में वर्ग कक्ष अधिक है और । इनके अलावा कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र ,शिक्षक प्रशिक्षण स्कूल महाविद्यालय, ए. एन. एम.प्रशिक्षण संस्थान जहां कम प्रशिक्षणार्थी है वहां दूरी बनाकर उन्हें प्रशिक्षण दिया ही जा सकता है। सरकार पहले स्कूल कॉलेजों एवं प्रशिक्षण संस्थानों का सर्वे करायें और जहां वर्ग कक्ष अधिक एवं परिसर बड़ा हो वहां बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाया जा सकता हैं। साथ ही उच्च विद्यालय में नीचे के वर्गों को रोककर कक्षा 10,11,12 के छात्रों की पढ़ाई आरंभ करवाने की व्यवस्था की जा सकती हैं।
जेटी न्यूज डेस्क/ आनंद रमण
बेगूसराय::-
कोरोना के दौर में स्वास्थ्य के साथ-साथ सबसे अधिक कुप्रभाव बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। पिछले 4 माह से स्कूल कॉलेज के बंद रहने से छात्रों की पढ़ाई ठप है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने पिछले दिनों कहा था कि बच्चों को पहले कोरोना से सुरक्षा बाद में शिक्षा। इस हकीकत को कोई नकार नहीं सकता है। बिहार सरकार ने अगस्त में स्कूल कॉलेज खोलने के बाबत अभिभावकों से उनकी राय जानने के लिए एक सर्वे कार्यक्रम चलाया था। इस सर्वे में 92% अभिभावकों ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आगे स्कूल नहीं खोलने की अपनी राय दी है। ऐसी स्थिति में ऐसा लगता है कि अगस्त माह में भी स्कूल कॉलेज खुलने की संभावना क्षीण है।
कोरोना से बचने के लिए बच्चों से लेकर शिक्षकों के बीच शारीरिक दूरी आवश्यक है और आज स्कूल संचालन की व्यवस्था में यह संभव नहीं लग रहा है। अलबत्ता नए सिरे से वर्ग संचालन की व्यवस्था की जाए तो कुछ हद तक यह संभव हो सकता है। वैसे अभिभावक कोरोना संक्रमण में कमी आने का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विभाग ने बिहार के शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि अगस्त,सितंबर,अक्टूबर माह तक स्कूल खोलने के बाबत अभिभावकों से रायशुमारी करें।
अभिभावकों के साथ बातचीत के दौरान सामने आए रायशुमारी के निष्कर्ष को बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक संजय कुमार सिंह के सूत्रों से जानकारी मिली कि अभिभावकों का मत है कि जब तक कोरोना संक्रमण में कमी नहीं आती है तब तक स्कूल नहीं खोला जाए। हां,स्कूलों में वर्ग संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्कूल में एक साल सभी बच्चे को नहीं बुलाया जाए। कक्षा चलाने और छुट्टी होने की अवधि कम किया जाए। स्कूल शिफ्ट में चलाया जा सकता है।
इसके साथ ही 1 दिन के अंतराल पर अलग वर्गों के छात्रों को बुलाकर वर्ग संचालन किया जा सकता है। कक्षा को आधे-आधे बांट कर कई जगह बैठने की व्यवस्था की जा सकती है, बशर्ते कि स्कूल में अधिक जगह उपलब्ध हो।खुले परिसर में भी दूरी बनाकर बच्चों का वर्ग संचालन हो सकता है। इनके अलावा अनेक अभिभावकों ने सरकार को सलाह दी है कि स्कूल में शुद्ध पानी,साफ सफाई और हाइजीन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
वर्चुअल पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए भौतिक रूप से कक्षाओं में कटौती होनी चाहिए। शारीरिक दूरी को लेकर शिक्षकों एवं छात्रों को प्रशिक्षित करना आज वक्त की मांग है। साथ ही बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इसी कड़ी में बी.ई.पी.के एस. पी.ओ. रविशंकर सिंह ने कहा कि अभिभावकों की राय है कि केंद्र सरकार कोरोना काल में निजी स्कूलों की फीस से राहत देने के लिए फीस नियंत्रण अधिनियम बनाए और वह मध्य-मार्गी हो। सरकार ऐसी रेगुलेटरी लाए जिससे अभिभावकों का वित्तीय बोझ भी कम हो और स्कूल को भी खर्चा निकल आए ताकि शिक्षक और अन्य कर्मी को नियमित वेतन मिल सके।
इसी क्रम में शिक्षाविद् सह दरभंगा स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद क्षेत्र प्रत्याशी इंजीनियर रामनंदन सिंह कहते हैं कोरोना महामारी की तीव्रता में कमी होने पर बड़े बच्चों का खासकर 9 ,10,11 और 12 के छात्रों का वर्ग संचालन सावधानी और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए शुरू किया जा सकता है कि जिस स्कूल में वर्ग कक्ष अधिक है और । इनके अलावा कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र ,शिक्षक प्रशिक्षण स्कूल महाविद्यालय, ए. एन. एम.प्रशिक्षण संस्थान जहां कम प्रशिक्षणार्थी है वहां दूरी बनाकर उन्हें प्रशिक्षण दिया ही जा सकता है।
सरकार पहले स्कूल कॉलेजों एवं प्रशिक्षण संस्थानों का सर्वे करायें और जहां वर्ग कक्ष अधिक एवं परिसर बड़ा हो वहां बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाया जा सकता हैं। साथ ही उच्च विद्यालय में नीचे के वर्गों को रोककर कक्षा 10,11,12 के छात्रों की पढ़ाई आरंभ करवाने की व्यवस्था की जा सकती हैं।



