सावित्री बाई फुले की जीवनी हम सबों के लिए प्रेरणादायक: डॉक्टर मुन्ना

मजेटी न्यूज़
मोतिहारी।पु0च0
आज देश की पहली महिला शिक्षिका और सामाजिक क्रांति की पुरोधा सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का जन्मदिन है।सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था।सावित्रीबाई को देश के वंचित तबकों और खासकरमहिलाओं की शिक्षा के लिए आवाज़ उठाने के लिए याद
किया जाता है। सावित्री एक बेहद मजबूत महिला थीं और आज से करीब100 साल पहले उन्होंने समाज से लड़कर लड़कियों के लिए 18 महिला स्कूल खोल दिए थे। सावित्रीबाई फुले का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था और सिर्फ 9 साल की उम्र में ही साल1840 में इनकी शादी 13 साल के ज्योतिरावफुले से कर दी गई। जब ज्योतिबा फुले ने उनसे शादी की तो ऊंची जाति के लोगों नेविवाह संस्कार के समय उनका अपमान किया तब ज्योतिबा फुले नेदलित वर्ग को गरिमा दिलाने का प्रण लिया।इनका जन्म 3 जनवरी, 1831 में दलित परिवार में हुआ था.। सावित्रीबाई फुले ने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले. उन्होंने पहला और अठारहवां स्कूल भी पुणे में ही खोला। सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला अध्यापक-नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता थीं।उन्होंने 28 जनवरी 1853 को गर्भवती बलात्कार पीडि़तों के लिए बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की।सावित्रीबाई ने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह और विधवा विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरुद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया। सावित्रीबाई फुले ने आत्महत्या करने जाती हुई एक विधवा महिला काशीबाई की अपने घर में डिलवरी करवा उसके बच्चे यशंवत को अपने दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया।. दत्तक पुत्र यशवंत राव को पाल-पोसकर इन्होंने डॉक्टर बनाया।महात्मा ज्योतिबा फुले की मृत्यु सन् 1890 में हुई. तब सावित्रीबाई ने उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिये संकल्प लिया।सावित्रीबाई की मृत्यु 10 मार्च 1897 को प्लेग के मरीजों की देखभाल करने के दौरान हुई।उनका पूरा जीवन समाज में वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता।

Website Editor :- Neha Kumari


