लोकोपयोगी ग्रन्थ है आह्निक पद्धति -कुलपति
लोकोपयोगी ग्रन्थ है आह्निक पद्धति -कुलपति
कुलपति प्रो.शशिनाथ झा ने आह्निक पद्धति ग्रन्थ का किया लोकार्पण
-केएसडीएसयू दरभंगा के दरबार हॉल में ग्रन्थ का हुआ विमोचन

प्रो अरुण कुमार/जेटी न्यूज
मधुबनी।प्रयत्नकीर्ति प्राच्य शोध संस्थान वाराणसी द्वारा ग्रन्थ लोकार्पण समारोह मंगलवार को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में आयोजित की हुई । महामहोपाध्याय परमेश्वर झा विरचित आह्निक पद्धति गन्थ का विमोचन केएसडीएसयू के कुलपति प्रो.शशिनाथ झा एवं पूर्व वेद विभागाध्यक्ष प्रो.विद्येश्वर झा ने संयुक्त रूप से किया । उक्त आशय की जानकारी देते हुएडॉ.रामसेवक झा ने बताया कि इस गन्थ का सम्पादन डॉ. हृषीकेश झा एवं डॉ.राघव कुमार झा द्वारा किया गया है ।
ग्रन्थ लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.शशिनाथ झा ने कहा कि जीर्ण एवं लुप्त दुर्लभ ग्रन्थ का महत परिश्रम कर प्रकाशित करने के लिए सर्वप्रथम ग्रन्थ सम्पादक अभिनन्दनीय है। यह ग्रन्थ अवश्य ही लोकोपयोगी सिद्ध होगा ।
विशिष्टातिथि प्रो.विद्येश्वर झा ने अपने सम्बोधन में कहा कि आह्निक पद्धति ग्रन्थ लोकोपयोगी है। यह ग्रंथ अवश्य ही समाज में गागर में सागर भरने का काम करेगा। प्रो.झा ने अपने वक्तव्य में पंच महायज्ञ का विस्तृत विवेचन कर विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत किये।
ग्रन्थ के सम्पादक डॉ. हृषीकेश झा ने ग्रन्थ परिचय प्रस्तुत किये। वहीं प्रयत्न कीर्ति शोध संस्थान के सचिव प्रो.प्रताप मिश्र ने प्रास्ताविक भाषण किया।
स्नातकोत्तर वेद विभाग के प्राध्यापक डॉ.ध्रुव मिश्र के वैदिक मंगलाचरण से शुरु इस समारोह में कुलानुशासक प्रो.श्रीपति त्रिपाठि,डीन डॉ.शिवलोचन झा,सीसीडीसी डॉ.दिनेश झा,विकास पदाधिकारी डॉ.पवन कुमार झा,व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो.दयानाथ झा, धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो.दिलीप कुमार झा, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ.कुणाल कुमार झा,प्रो.लक्ष्मीनाथ झा, डॉ.विनय कुमार मिश्र,परीक्षा नियंत्रक डॉ.शैलेन्द्र मोहन झा, डॉ.शम्भु शरण तिवारी, डॉ.दिनेश्वर यादव, डॉ.सुधीर झा, डॉ.संजीत कुमार झा,रमन कुमार, अशोक कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे ।
लोकार्पण समारोह का संचालन राजकीय महाविद्यालय उतराखंड के साहित्य प्राध्यापक डॉ.राघव कुमार झा तथा धन्यवाद ज्ञापन आदर्श संस्कृत महाविद्यालय रमौली के साहित्य प्राध्यपक डॉ.पुष्कर आनन्द ने किया । कार्यक्रम में तकनीकि सहयोग डॉ.शम्भु तिवारी ने किया ।

