जुमा जुमा आठ दिन भी पूरे नहीं हुए कि पूर्णियां विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. पवन कुमार झा के विरुद्ध शुरु हो गया है विरोध
किशनगंज में छात्र संगठन जहां उनके पुतले जलाए वहीं यादव डिग्री कॉलेज प्रबंधन सांसद प्रदीप सिंह को जनप्रति सदस्य बनाने से हैं खफा
जुमा जुमा आठ दिन भी पूरे नहीं हुए कि पूर्णियां विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. पवन कुमार झा के विरुद्ध शुरु हो गया है विरोध
किशनगंज में छात्र संगठन जहां उनके पुतले जलाए वहीं यादव डिग्री कॉलेज प्रबंधन सांसद प्रदीप सिंह को जनप्रति सदस्य बनाने से हैं खफा
*प्रभारी कुलपति अपने पद और पावर का कर रहे हैं दुरुपयोग, राजभवन को डार्क में रख विरोध के बाबजूद अपने चहेते को बना रहे जनप्रतिनिधि सदस्य और ट्रांसफर पोस्टिंग। जबकि उन्हें नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।*

अररिया ।
पूर्णियां विश्वविद्यालय पूर्णियां के प्रति कुलपति प्रो. पवन कुमार झा
को राजभवन द्वारा 18,08,2024 को प्रभारी कुलपति का प्रभार दिया गया है। एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ कि उनके कार्य प्रणाली से उनका विरोध शुरू हो गया है। गुरूवार को छात्र नेताओं ने जहां किशनगंज कॉलेज में प्रभारी कुलपति का पुतला दहन किया वहीं विश्वविद्यालय द्वारा जनप्रतिनिधि सदस्य बनाने में भी भेद भाव बरता गया। इस बाबत एम एल डी पी के वाई कॉलेज अररिया के सचिव प्रो. उपेन्द्र प्रसाद यादव ने राजभवन,मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री ,प्रधानसचिव आदि को आवदेन देकर विश्वविद्यालय में इनके पूर्व कार्यकाल एवम वर्तमान कार्य की काले कारनामे की जांच आर्थिक अपराध इकाई, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो बिहार, निगरानी विभाग से कराने की मांग उठाई है।
*एम एल डी पी के यादव को राजनीति का अड्डा मत बनाइए वीसी साहब*
राजभवन, मुख्यमंत्री आदि को भेजे गए अनुरोध पत्र में लिखा गया कि 18,08,2024 को प्रभारी कुलपति के प्रभार मिलने बाद प्रो.पवन कुमार झा पद और पालर का दुरुपयोग करते हुए विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारियों को हटा दिया है। और पुर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत सभी संबंधन प्राप्त महाविघालय में शाशी निकाय के जनप्रतिनिधि के जगह पर अपने चहेते को जनप्रतिनिधि सदस्य बनाया है ,जो जांच का बिषय बनता है। माल महराज के मिर्जा खेले होली के तर्ज पर शासी निकाय में जनप्रतिनिधि बनाया है धोर अनियमितता एवं दलालों से घिरे कुलपति प्रो पवन कुमार झा दलालों के ईशारे पर कार्य करने का आरोप लगाया।
*क्या है यादव कॉलेज का मामला*

एम एल डी पी के यादव कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. इंदु कुमार सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह को जनप्रतिनिधि सदस्य बनाया। उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। तीन वर्षीय उनके कार्यकाल में महाविद्यालय राजनीति का अखाड़ा बना रहा। उन्होंने विश्वविद्यालय को कई अलग अलग तिथि में पत्र भेजकर कुलपति से अनुरोध किया कि सांसद प्रदीप कुमार सिंह को छोड़कर किसी को यहां जनप्रतिनिधि बना दीजिए। लेकिन आपत्ति दर्ज़ के बाबजूद प्रभारी कुलपति प्रो पवन कुमार झा ने सांसद प्रदीप कुमार सिंह को हीं दुबारा इस कॉलेज का जनप्रतिनिधि बना दिया। शिक्षा विदों का मानना है कि यदि प्रभारी कुलपति प्रो पवन झा किसी कॉलेज के जनप्रतिनिधि बनाने में उलट पलट नहीं करते तो एक बात कहा जाता कि किसी भी कॉलेज में उलट फेर नहीं किया है बल्कि पुरानी सूची को हीं तरजीह दी गई। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। रही बात यादव कॉलेज की तो यहां से कई पत्र पूर्व और वर्तमान वीसी को सांसद के क्रिया कलाप का चित्रण करते हुए उनको छोड़ किसी अन्य को बनाने के लिए लिखा गया। लेकिन विरोध के बाबजूद सांसद प्रदीप सिंह को दुबारा और इतनी जल्दबाजी में अधिसूचना जारी करना भी एक विचारणीय प्रश्न है।

जबकि प्रभारी कुलपति को उनके नियुक्ति पत्र में नीतिगत निर्णय लेने से पहले राजभवन से मंत्रणा लेना जरूरी है। यादव कॉलेज प्रशासन ने अधिसूचना जारी से एक दिन पूर्व प्रभारी वीसी को सारा वृतांत की जानकारी देते हुए बधाई दिया था। उस वक्त उनके चेंबर में सेवानिवृत प्राध्यापक सह पूर्व विश्वविद्यालय पदाधिकारी चंद्रकांत यादव भी मौजूद थे। अधिसूचना जारी के सात घंटे पूर्व भी वीसी, रजिस्ट्रार के मेल आईडी पर प्रदीप सिंह को छोड़ कर किसी अन्य को बनाने का अनुरोध किया। लेकिन ऐसी क्या मजबूरी बन गई कि एक दो कॉलेज के जनप्रतिनिधि को अदल बदल दिया लेकिन आरोप वाले कॉलेज में दुबारा उसी को बनाया गया।
बहरहाल जो हो एम एल डी पी के यादव डिग्री कॉलेज प्रकरण ने प्रभारी वीसी के कार्य पद्धति पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। मामला तूल पकड़ रहा है। कॉलेज में यदि बैठक के दौरान किसी प्रकार की घटना घटी तो इसकी सारी जवाबदेही प्रभारी वीसी पवन झा की होगी। वैसे कॉलेज के पूरवर्ती छात्रों की मानें तो यह मामला वीसी के विरुद्ध न्यायालय में जाएगा।

