देश के गद्दार के नाम पर दिल्ली में कॉलेज खोलने की घोषणा गद्दारों को महिमा मंडित के सिवा तेरे पास रखा क्या है
देश के गद्दार के नाम पर दिल्ली में कॉलेज खोलने की घोषणा
गद्दारों को महिमा मंडित के सिवा तेरे पास रखा क्या है
प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज़, नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध चल रहे आंदोलन को हिंदू के नाम पर कमजोर करने वाला,अंग्रेजों की चाटुकारी के लिए पेंशन पाने वाला और आजादी के बाद महात्मा गांधी की हत्या कराने वाला देश का गद्दार सावरकर को महिमा मंडित करने की योजना बनाई जा चुकी है। भाजपा और संघ परिवार सावरकर के जेल जीवन को उपलब्धि बताते हैं। उसको स्वतंत्रता सेनानी साबित करने में कोई कर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।क्योंकि देश की आजादी में संघ और भाजपा को उस गद्दार के शिवाय कोई अपना नजर भी नहीं आता।
1904 में सावरकर ने यंग इंडिया सोसाइटी नाम की एक संस्था बनाई थी।जिसमें देश के युवाओं को शामिल कर हिंदू राष्ट्र की भक्ति पढ़ाता था।जिसका स्पष्ट मकसद था अंग्रेजों के विरुद्ध चल रहे आंदोलन से युवाओं को विमुख करना।विपरीत दिशा देना।अंग्रेजों को मदद पहुंचना।जब1915 में पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा हिंदू महासभा स्थापित किया गया।तो उसमें केशव बलिराम हेडगेवार उसके उपाध्यक्ष बनाए गए थे।इस संगठन का भी वही मकशद था।फिर 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का भी वही मकशद था कि अंग्रेजों के विरुद्ध चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए हिंदू राष्ट्र के नाम पर हिंदुओं को गुलामी के खिलाफ चल रहे आंदोलन से विमुख करना।यहीं कारण था कि आज इनके विचार का एक भी आदमी देश की आजादी का ईमानदार हिस्सेदार इनको गद्दारों के अलावे दूसरा कोई नहीं मिल रहा। 1942 में इनके सबसे महान नेता अटल बिहारी वाजपेई कोर्ट में अपने क्रांतिकारी चाचा को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने वाला बतला कर जेल में डलवाया।तो ए आई एस एफ एक वामपंथी छात्र संगठन ने अंग्रेजों की चाटुकारी का इल्जाम लगा कर अखिल भारतीय छात्र संघ से निष्कासित कर दिया था।इनके दूसरे बड़े नेता जो आजादी मिलने के बाद 12 साल की उम्र में एक भगोड़ा के रुप में पाकिस्तान से भाग कर भारत आए थे।उनका नाम था लालकृष्ण आडवाणी।इस तरह इनका विरासत साफ साफ दिखता है कि इनका संस्कार क्या रहा है।

दूसरी तरफ अपने सबसे कट्टर शत्रु कम्युनिस्टों को मानते हैं।जिनका इतिहास शहादत, कालापानी और जेल जीवन का रहा है।तो कम्युनिस्ट विचार रखने वाले शहीद ए आजम भगत सिंह,अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद,राजगुरु, सुखदेव ,अशफाक उल्ला खां ,रामप्रसाद बिस्मिल ,रौशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी जैसे शहादत देने वाले लाखों रहे,तो का . शिव वर्मा,पंडित किशोरी लाल जैसे हजारों कलापानी की सजा पाने वाले सेल्यूलर जेल अंडमान निकोबार जाने वाले भी थे। आजादी के लिए जेल जाने वाले सिर्फ माकपाइयों की बात करूं तो भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का 9 सदस्यीय प्रथम पोलित ब्यूरो सदस्य जिन्हें नवरत्न कहा गया।उनमें एक भी ऐसा नहीं रहा जिनका जेल जीवन 10 साल से कम रहा हो।का. हरकिशन सिंह सुरजीत ने लन्दन में तिरंगा फहराया तो गिरफ्तारी के बाद अपना नाम लंदनतोड़ सिंह बतलाया। बी. टी. रणदीवे, ए के गोपालन, इ एम एस नंबूदरीपाद,पी रामामूर्ति,एम वासवपूनैया,पी सुंदरैया,प्रमोद दासगुप्ता,ज्योति बसु,हरकिशन सिंह सुरजीत जैसे नवरत्नों का सिलसिला मिला।तो आजाद हिंद फौज की महिला सेल की चीफ कमांडर कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी रणबांकुरा भी है।




