पूर्व मंत्री डॉ. रेणू कुशवाहा और अन्य प्रमुख दावेदारों के बीच चुनावी रण में बढ़ी खींचतान
पूर्व मंत्री डॉ. रेणू कुशवाहा और अन्य प्रमुख दावेदारों के बीच चुनावी रण में बढ़ी खींचतान

जे टी न्यूज, बिहारीगंज:
विधानसभा चुनाव नजदीक आ चुका है और प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा भी शुरू कर चुके हैं। क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और प्रमुख नेता अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हो गए हैं। इस समय बिहारीगंज विधानसभा में कई कद्दावर नेता और दावेदार अपने चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम है पूर्व मंत्री डॉ. रेणू कुशवाहा का, जिनके चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं तेज हैं। जनता का दबाव उन पर चुनाव लड़ने का है और वह इस पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
डॉ. कुशवाहा के रिश्ते दोनों प्रमुख गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन से अच्छे हैं, जिससे यह साफ है कि चुनावी रण में उनका नाम दोनों पक्षों में चर्चित है।
राजद की ओर से इस बार टिकट की दावेदारी को लेकर ई. प्रभाष भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। प्रभाष, जो पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रहे हैं, इस बार भी राजद का टिकट पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में

लगातार दौरे किए हैं और जनता से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। उनका प्रयास है कि वह पार्टी नेतृत्व को अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण दिखा सकें, ताकि उन्हें टिकट मिल सके। प्रभाष का कहना है कि वह जनता की समस्याओं को लेकर हमेशा सक्रिय रहे हैं और विधानसभा में अपनी आवाज उठाने का कार्य करेंगे।

कांग्रेस और भाजपा के दावेदारों में भी प्रतिस्पर्धा
अगर कांग्रेस की बात करें, तो इस बार पार्टी की ओर से राजद से प्रदेश सचिव देवेश कुमार सिंह के अलावा स्वर्गीय मेघराज बोथरा के सुपुत्र विजय जैन , केशर कुमार सिंह का नाम भी इस सीट पर उम्मीदवार के रूप में लिया जा रहा है। विजय जैन व्यापारियों का समर्थन प्राप्त करने के साथ-साथ व्यापारिक समुदाय से जुड़े एक सशक्त नेता माने जाते हैं। वहीं, भाजपा की दावेदारी भी अब मजबूत नजर आ रही है। भाजपा इस बार इस सीट पर कब्जा करना चाहती है, खासकर जब इस जिले में उसे पिछले चुनावों में कोई सीट नहीं मिली थी। पूर्व मंत्री रविंद्र चरण यादव भाजपा के एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभर कर सामने आए हैं।

महिला उम्मीदवारों की भी चर्चा:
यहां की चुनावी राजनीति में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कटिहार मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा भारती भी इस सीट पर एक सशक्त महिला उम्मीदवार मानी जा रही हैं। उनके ससुर स्वर्गीय मदन मोहन यादव, जदयू के कद्दावर नेता थे और उनके परिवार का इस क्षेत्र में अच्छा नाम है। डॉ. पूजा भारती महिला उम्मीदवारों की सूची में एक मजबूत दावेदार बनकर उभरी हैं, जिनका क्षेत्र में बहुत सम्मान है।
कांग्रेस के सशक्त उम्मीदवार
कांग्रेस पार्टी की ओर से भी एक और मजबूत दावेदार के रूप में एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह का नाम सामने आ रहा है। संजय कुमार सिंह अपने मित्रमंडली में ‘गुरु जी’ के नाम से जाने जाते हैं और उनकी राजनीति में एक बेदाग छवि है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई सामाजिक कार्य किए हैं और उनका लोगों से गहरा जुड़ाव है। कांग्रेस के लिए उनकी दावेदारी को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उनके पास संगठन की अच्छी समझ और क्षेत्रीय राजनीति का गहरा अनुभव है।
वर्तमान विधायक और पारिवारिक विरोध
वर्तमान विधायक निरंजन कुमार मेहता का कार्यकाल अब तीसरे चरण में प्रवेश कर चुका है, लेकिन उनके लिए चुनावी राह आसान नहीं होगी। उनकी पत्नी कुमुद कुमारी, जो पंचायत की मुखिया रह चुकी हैं, की हार ने उनके परिवार की छवि को कुछ हद तक धूमिल किया है। उनके परिवार में सशक्त विरोधी भी हैं, जो चुनाव में उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकते हैं। अगर निरंजन कुमार अपने परिवार के मुद्दों को समेटने में नाकाम रहे, तो चुनावी परिणामों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
प्रभाष कुमार और बीवी प्रभाकर की दावेदारी
पूर्व विधायक सिंघेश्वर मेहता के पुत्र प्रभाष कुमार की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है। प्रभाष ने पिछले ग्राम पंचायत चुनाव में अपनी सशक्त दावेदारी प्रस्तुत की थी और उन्होंने निरंजन मेहता की पत्नी को हराया था। वह भाजपा के सदस्य हैं, लेकिन प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज पार्टी नजरें भी उन पर टिकी हुई हैं, जदयू के कद्दावर नेता बीवी प्रभाकर भी इस क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान रखते हैं। उनका परिवार इस इलाके में एक प्रतिष्ठित नाम है और उनके समर्थक उन्हें चुनावी मैदान में उतारने के लिए दबाव बना रहे हैं।
बिहारीगंज विधानसभा चुनाव में इस बार कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रही हैं और हर दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। अब यह देखना होगा कि किस पार्टी या उम्मीदवार को इस सशक्त और चुनौतीपूर्ण सीट पर सफलता मिलती है।

