तकनीकी शब्दावली इतिहास एवं संस्कृति” विषय पर चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

तकनीकी शब्दावली इतिहास एवं संस्कृति” विषय पर चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

जे टी न्यूज, पूर्णिया: पूर्णियाँ कॉलेज, पूर्णियाँ में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग), भारत सरकार एवं पूर्णिया कॉलेज, पूर्णिया के तत्वावधान में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में तकनीकी शब्दावली इतिहास एवं संस्कृति” विषय पर चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन के मुख्य अतिथि रायगंज विश्वविद्यालय, रायगंज के कुलपति प्रो. दीपक कुमार रॉय ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि शब्द भाषा का प्रमुख अंग है । पर्यायवाची शब्द के चयन में अनेक कठिनाइयां है। तकनीकी शब्दों के अर्थ पर लगातार अभ्यास की जरूरत है। विभिन्न भाषाओं के शब्द, ज्ञान और संस्कृति संस्कृत पर आधारित है। नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं है बल्कि संस्कृति का भी वाहक है।
प्रो. गजेन्द्र पाठक, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद ने कहा कि पूर्णिया में 12 मातृभाषा प्रचलन में है। भाषा और शब्द सचिवालय और सरकारी कार्यालय में नहीं बनते है, शब्द जनता के जीवन संघर्ष में बनता है। भाषा की बहुतयता भारत की ताकत है। अंग्रेजों के समय भारतीय शिक्षा को इतना काला कारण कर दिया गया कि काला भी शर्मिंदा हो गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय परंपरा और संस्कृति को उजागर करने का एक प्रयोग है यह अंतिम नहीं है। प्रधानाचार्य प्रोफेसर शंभू लाल वर्मा ने कहा की पूर्णिया साहित्यकारों की धरती है, लेकिन वे उपेक्षित है, पूर्णिया के साहित्यकारों के नाम पर रेल का नामकरण हो। हाटे बाजारे एक्सप्रेस का संबंध पूर्णिया के साहित्यकारों से संबंध रखता है।
वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग), भारत सरकार के प्रतिनिधि शहजाद अंसारी और सुमित भारती ने 20 विशिष्ट शब्द पर चर्चा की और कहा कि चर्चा में आए महत्वपूर्ण सुझावों को आयोग से अवगत कराया जाएगा।
प्रथम सत्र का संचालन डॉक्टर अंकिता विश्वकर्मा ने किया।
दूसरे सत्र में शोध छात्रों ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य प्रो प्रमोद कुमार सिंह और डॉ सी के मिश्रा ने किया । शोधार्थियों द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किया गया। दूसरे सत्र का संचालन अमृता सिंह ने किया ने किया।
संगोष्ठी के सह समन्वयक प्रो सुनील कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि हम वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, शिक्षा मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग), भारत सरकार के अध्यक्ष प्रोफेसर ग्रीस नाथ झा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो विवेकानंद सिंह, प्रधानाचार्य प्रो शंभू लाल वर्मा और संगोष्ठी के समन्वयक डा प्रेममोहन कृष्ण का विशेष आभारी हूँ। संगोष्ठी को सफल बनाने में महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेतर और छात्र छात्राएं ने काफी मेहनत की है। इस अवसर पर डॉ मनीष कुमार सिंह, डॉ. अभिषेक आनंद, , डॉ. सुमित सिंह, डॉ रामदयाल पासवान, डॉ इश्तियाक अहमद, श्री राजेश झा, डॉ सीता कुमारी, श्री ज्ञानदीप गौतम, अमृता सिंह, डॉ मुजाहिद हुसैन, डॉ निरुपमा राय, डॉ विजय कुमार गुप्ता, डॉ कुमारी अनु, डॉ नेहा कुमारी जायसवाल सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और अधिक संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थी। ।

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