क्या आपने किया स्नान

क्या आपने किया स्नान


जे टी न्यूज़                                                                                        मैने नहीं किया स्नान
तो क्या केशव
तुम करोगे व्यवधान?
अरे ये कैसा है प्रावधान?
सिर्फ स्नान को बताया
पापों और मुक्ति का समाधान
अरे ये कैसा मचा है घमासान?
कहां गया कर्म और कर्मफल का प्रावधान?
जिसका तुमने किया था कुरुक्षेत्र से ऐलान?

तुमने बनाया चांद सितारे
हम मनुष्यों को सबसे न्यारे
ग्रह नक्षत्र प्यारे प्यारे
तुम बुद्धिमान परमपिता
और
परमेश्वर हमारे
फिर भी
हम इंसान
है
स्नान के सहारे
लगाते नहीं
बुद्धि हमारे
ठगते है
खुद को सारे

अरे लिखा जरूर है मैने इसे
लेकिन
मैं भी तेरा कलम भी तेरी
जुबां भी तेरी बुद्धि भी तेरी
मेरे माध्यम बता रहे
हम मनुष्यों को
सिखा रहे

श्रद्धा भक्ति से
इनकार नहीं
ऐसा नहीं की
मुझे
मान्यताओं से
प्यार नहीं
लेकिन
विरोध है
मुक्ति की चाह
और
कर्म दुर्भाव से !
है राधे राह दे

नीरज कुमार (लेखक, प्रेरक वक्ता के कलम से )

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