वर्षों से बंद पड़े खादी भंडार बिक्री केंद्र को चालू करने की मांग

वर्षों से बंद पड़े खादी भंडार बिक्री केंद्र को चालू करने की मांग जे टी न्यूज मधुबनी। जिले के लदनियां प्रखंड मुख्यालय के मुख्य बाजार स्थित खादी ग्रामोद्योग भंडार की दुकान लगभग डेढ़ दशक से भी अधिक समय से बंद पड़ी है। जिससे खादी ग्रामोद्योग के द्वारा उत्पादित व निर्मित खादी का कपड़ा पहनने वालों को काफी असुविधाएं होती है।वे चाहकर भी इसे नहीं खरीद पा रहे हैं। आखिर यहां खादी ग्रामोद्योग भंडार के द्वारा निर्मित व बेचें जाने वाली सरकारी दुकान में वर्षों से लगें ताला के कारण आखिरकार वे करे भी तो क्या? लोगों को चाहत रहते हुए भी खादी के शौकीनों को दूसरे कपड़ों का सहारा लेना पड़ता है। ज्ञात हो कि मधुबनी जिला में निर्मित खादी ग्रामोद्योग का कपड़ा बड़े नेता से लेकर छुटभैया नेता तक पहनते थे ‌। खादी कपड़ा उत्पादन से लेकर बिक्री तक के लिए कांग्रेस सरकार में हस्त चरखा से लेकर कपड़ा तैयार करने वाले मिल, चरखा उधोग, एवं बिक्री केंद्र की स्थापना मधुबनी जिला के प्रत्येक प्रखंड में किया गया। भवन एवं चरखा की व्यवस्था कर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था। परंतु कांग्रेस के बाद बनीं राजद की सरकार तक खादी ग्रामोद्योग भंडार व खादी केन्द्रो में कपड़ा, देहाती सरसों तेल,मधु की आपूर्ति हुआ करती थी, परंतु समय और सरकार बदलते ही खादी ग्रामोद्योग भंडार एवं खादी केन्द्र बंद हो गया। बता दें कि यहां खादी ग्रामोद्योग भंडार की अपनी जमीन व आलिशान भवन एवं बिक्री केंद्र है। यहां लदनियां में गांधीवादी नेता व बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व देव नारायण यादव ने 1990 के दशक में लदनियां मुख्य बाजार में खादी ग्रामोद्योग भंडार के नये भवन, बिक्री केंद्र एवं चरखा की व्यवस्था अपने ऐक्छिक कोष से किया था। इसके पीछे उनका उद्देश्य था महिलाओं को चरखा उधोग से जोड़ कर स्वावलंबी बनाना। लेकिन खादी ग्रामोद्योग भंडार व बिक्री केंद्र बंद होने के बाद एक ओर जहां लोगों का रोजगार छिन गया वहीं दूसरी ओर दुकान बंद होने के बाद इसकी देखभाल भी नहीं हो रही है।जब भवन नहीं था तब भी मधुबनी जिला के कई जगह लोहा, मधुबनी एवं भौआरा में चरखे व करघा चला करता था। इससे काफी लोगों को रोजगार मिल रहा था। गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस पर लोगों को राष्ट्रीय ध्वज, टोपी, एवं कपड़ों की खरीदारी के साथ साथ खादी पहनने वालों को खरीददारी खादी ग्रामोद्योग भंडार व बिक्री केंद्र के बजाय खुले बाजार से करनी पड़ती है। जहां गांधी एवं देश भक्ति के राग अलापने वाले लोगों एवं नेताओं ने जनसरोकारी उधोग को बंद कर मिलावटी उधोग में समानों को बढ़ावा दे दिया है। खादी ग्रामोद्योग भंडार व बिक्री केंद्र के कपड़ा पहनने वालों का आरोप है कि सरकार मजदूरों, बेरोजगारी, पलायन से बचाने हेतु सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना को बंद कर, मिलावटी उधोग चलाने वाले उधोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

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