तुम्हारी आँखों में छुपे राज
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तुम्हारे आँखों के समंदर में छुपे रहते हैं गहरे राज,
शिद्दत-ए-चाहत की गहराई ठहरे से अल्फाज।
शोर समेटे हुए खामोश सी रहती है तुम्हारी आँखें।
तमस में उजास,ख्वाबों की परवाज भरती आंखें। खुशियों की प्रेमिल रोशनी सी बेहतरीन है तुम्हारीआँखें,
कभी गमों के काले बादल सा गमगीन है तुम्हारी आँखें।
कितनी आशाएँ कितने सपने बिखरे रहते हैं पलकों पे,
कोई अद्भुत प्रेम कहानी सी रंगीन है तुम्हारी आँखें।

खामोश लम्हों में एहसास बयां करतीहै बहुत कुछ कहती,
मौन रहकर भी बेबसी तन्हाई छुपा लेती है तुम्हारी आँखें।
प्रेम का मौन निमंत्रण देकर मुझे प्रतिपल पास बुलाती है,
इशारों में ही मन का नगर को लूट लेती है तुम्हारी आँखे।
स्वरचित
अनुपमा सिंह सोनी✍
पटना

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