सरपंच गांव के भोले व सीधे लोग थे इसलिए हो गई सजा – आरके राय
पूछा पीएम की डिग्री भी है फर्जी, अदालत क्यों है खामोश।
सरपंच गांव के भोले व सीधे लोग थे इसलिए हो गई सजा – आरके राय /पूछा पीएम की डिग्री भी है फर्जी, अदालत क्यों है खामोश। /कहा आजादी के 75 सालों में किसी अवैध संगठन और उसके गुर्गों के आगे अदालतों को इतना बेवश और लाचार नहीं देखा गया
जे टी न्यूज, नई दिल्ली। वे सरपंच थे और गांव के सीधे सादे, भोले लोग थे। इसलिए माननीय उच्च न्यायालय के जज ने सजा सुना दी। हालिया दिनों में मोदी-शाह की जोड़ी ने कई बार साबित किया है कि इस देश में आम आदमी, आम जन प्रतिनिधि, सत्ताधारी दल और विपक्ष के विधायक सांसद आदि नेताओं के लिए एक मामले में एक ही कानून की अलग-अलग परिभाषाएं हैं। अप्पन पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव आरके राय ने उक्त बातें कही। वे फर्जी डिग्री मामले में पिछले दिनों राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2015 पंचायत चुनाव में करीब आधे दर्जन महिला पुरुष फर्जी आठवीं पास का प्रमाण पत्र दिखा कर चुनाव लड़े सरपंच का मामला सामने आया था। अलग-अलग समय पर पराजित उम्मीदवार द्वारा मामला संज्ञान में लाये जाने पर माननीय उच्च न्यायालय ने सबको तीन साल की कैद और हजार हजार रुपए जुर्माना की सजा सुना दी। फैसला आने तक कुछ ने तो अपना कार्यकाल पूरा कर पुर्व या भूतपूर्व हो गये थे, कुछ की सरपंची भी छिन ली गयी। सिर्फ इसलिए कि वे गांव के सीधे सादे भोले लोग थे और पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि थे। फर्जी डिग्री दिखा कर प्रधानमंत्री बने व्यक्ति के खिलाफ तो आज तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। क्यों? देश की शीर्ष अदालत की इस मामले में खामोशी तो यही साबित करती है कि सरपंच और प्रधानमंत्री के फर्क की तरह फर्जी प्रमाण पत्र मामले में प्रावधान भी अलग-अलग है। बताते चलें कि विगत दो जून 2025 को मिली खबर के अनुसार एक आठ साल पुराने मामले में राजस्थान की शीर्ष अदालत में एसीजेएम डाॅ पियुष जौली ने मेघनिवास पंचायत की पुर्व सरपंच रतनी देवी को तीन साल कैद और एक हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। राजस्थान हाईकोर्ट केलिये यह पहला मामला नहीं था, इसके पुर्व भी डाॅ जौली नेमई 2024में ऐसे ही एक मामले में ठुकराई की पुर्व सरपंच दुर्गा बाई को भी ऐसी ही सजा सुनाई थी। इसके पहले भी हिंडोली सरपंच उर्मिला देवी, अमेठा सरपंच जय प्रभू लाल सहित कई सरपंचों के खिलाफ फैसले आते रहे हैं। मगर आजतक प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमाण पत्रों के विरुद्ध किसी न्यायाधीश की कलम साहस नहीं जुटा सकी। श्री राय ने कहा कि आजादी के 75 सालों में खास कर अदालतों को एक दो व्यक्ति या किसी अवैध संगठन के आगे इतना लाचार और बेवश कभी न सुना न हीं देखा। प्रधान मंत्री खुद कह चुके हैं कि उन्होंने पढाई वढाई नही की है।
ट्रेन में चाय बेचते थे। अचानक से उनके प्रमुख सिपहसालार प्रकट होते हैं और बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस में मोदी जी के बी ए, एम ए, आदि किये जाने की घोषणा करते हैं और दूर से ही सही मगर प्रमाण पत्र दिखाते हैं।
अमित शाह के अनुसार मोदी जी एन्टायर पाॅलिटिकल साईंस मे एम ए किया। जबकि यह विषय आज भी अछूता है। इस विषय में वे अकेले थे। आज तक दूसरा नहीं हुआ। पढाया कौन यह गूढ रहस्य है।
खैर! अमित शाह ने जो सर्टिफिकेट दिखाया वह डिजिटल प्रिंटिंग में है। डिजाइन भी कंप्यूटर पर तैयार किया गया है। जबकि अस्सी के दसक में सर्टिफिकेट पर नाम स्याही वाली कलम से लिखे जाते थे।
इसके अलावा भी कई झोल हैं पी एम के सर्टिफिकेट में। मगर मामला देश के प्रधानमंत्री का है। विपक्ष युवा है, समस्त सक्षम प्राधिकार पर मोदी-शाह का कब्जा है। फिर सैंया भये कोतवाल वाली कहावत चरितार्थ होनी ही है।



