मधेपुरा के लाल साकार यादव वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हाई-टेक इंडिया का परचम लहराएंगे
मधेपुरा के लाल साकार यादव वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हाई-टेक इंडिया का परचम लहराएंगे

जे टी न्यूज़, मधेपुरा :
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि मधेपुरा के इतिहास में दर्ज होने वाला वह क्षण है, जब एक छोटे शहर से निकली सोच वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी ताकत का परिचय देगी। मधेपुरा के होनहार पुत्र साकार यादव स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में भाग लेकर भारत की हाई-टेक लीगल एआई क्रांति को दुनिया के सामने रखेंगे।
19 से 23 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस विश्वस्तरीय सम्मेलन में साकार यादव न सिर्फ एक प्रतिनिधि होंगे, बल्कि वे उस नई पीढ़ी की आवाज़ होंगे जो भारत को टेक्नोलॉजी सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
दावोस: जहाँ भविष्य की स्क्रिप्ट लिखी जाती है
स्विट्ज़रलैंड का दावोस कोई साधारण शहर नहीं है। यही वह मंच है जहाँ वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सामाजिक संरचना की अगली दिशा तय होती है। दुनिया की सरकारें, Fortune-500 कंपनियाँ, टेक जायंट्स और पॉलिसी-मेकर यहाँ बैठकर आने वाले दशकों का रोडमैप बनाते हैं।
ऐसे मंच पर मधेपुरा के लाल का आमंत्रण इस बात का संकेत है कि अब भारत सिर्फ फॉलोअर नहीं, ग्लोबल लीडर बनने की कतार में है।
Legal AI से Global Impact तक
साकार यादव की कंपनी LexLegis.ai भारत की स्वदेशी लीगल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पहल है, जो भारतीय कानूनों, न्यायिक फैसलों और दशकों की कानूनी समझ पर आधारित है। यह प्लेटफॉर्म दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी को न्याय, पारदर्शिता और पब्लिक सर्विस से जोड़ा जा सकता है।
दावोस में साकार यादव
लीगल एआई का भविष्य,
भारत का उभरता GCC (Global Capability Center) इकोसिस्टम,
और वैश्विक कानूनी सेवाओं में भारत की बढ़ती भूमिका
जैसे हाई-इम्पैक्ट विषयों पर दुनिया के शीर्ष दिमागों से संवाद करेंगे।
छोटे शहर से ग्लोबल स्टेज तक
साकार यादव की यह यात्रा मधेपुरा के हर युवा के लिए संदेश है—
अगर विज़न बड़ा हो, तो मंच अपने आप मिल जाता है।
जहाँ LexLegis.ai की शुरुआत एक मिशन-ड्रिवन पब्लिक सर्विस आइडिया के रूप में हुई थी, वहीं आज यह प्लेटफॉर्म भारत की Responsible AI सोच का ग्लोबल उदाहरण बन चुका है।
बिहार → भारत → विश्व
यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्ति या कंपनी की नहीं है।
यह मधेपुरा की पहचान, बिहार की प्रतिभा और भारत की टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की कहानी है।
जब 19 से 23 जनवरी 2026 के बीच दावोस की गलियों में दुनिया भविष्य पर चर्चा करेगी, तब वहाँ मधेपुरा का नाम, भारत की सोच और साकार यादव का विज़न साथ-साथ चल रहे होंगे।



