कैंसर निरोधी एचपीवी वैक्सीन के महिलाओं पर कई दुष्प्रभाव।
प्रधानमंत्री मोदी को पत्र
कैंसर निरोधी एचपीवी वैक्सीन के महिलाओं पर कई दुष्प्रभाव।

जे टी न्यूज, नई दिल्ली (डॉ.समरेंद्र पाठक): राष्ट्रीय जनता दल के बिहार से सांसद सुधाकर सिंह ने कैंसर निरोधी एचपीवी वैक्सीन के महिलाओं पर कई दुष्प्रभाव के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आगाह किया है।
सांसद सिंह ने पत्र में कहा है,कि एचपीवी वैक्सीन सर्विक्स कैंसर का बचाव नहीं बल्कि महिलाओं का अघोषित बंध्याकरण अभियान हैं। उन्होंने इसके दुष्प्रभावों के बारे में संसदीय समिति की रिपोर्टों का हवाला भी दिया है।उन्होंने कहा कि देश के सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं,कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्विक्स) भारत के भीतर चुनौती के रूप में नहीं रहा है। इसका मुख्य कारण यह है,कि भारतीय और पश्चिमी संस्कृति में जमीन-आसमान का फर्क है ।
श्री सिंह ने लिखा है, कि पश्चिमी सभ्यता में शारीरिक संबंध बनाने की स्वच्छंद नीति है,जो आधुनिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की आड़ में कभी-कभी व्यभिचार की सीमा को भी पार कर जाती है । जिसके चलते वहाँ की अवयस्क बच्चियाँ भी असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाती हैं। इसका दुष्परिणाम यह होता है,कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (सर्विक्स) जैसी कई तरह की घातक बीमारियाँ घर कर जाती हैं ।
इस तरह के वैक्सीन निर्माण की कवायद के तहत भारत जैसे विकासशील देशों की गरीब बच्चियों पर 14 वर्ष से पूर्व एचपीवी वैक्सीन का ट्रायल किया गया था, जिसके चलते कई बच्चियों की मौत के साथ बाँझपन की व्यापक शिकायतें प्राप्त हुईं ।
राजद सांसद श्री सिंह ने पत्र में लिखा है, कि श्री बृजेश पाठक की अगुआई वाली राज्यसभा की स्वास्थ्य मामलों की स्थायी समिति ने तीन वर्ष के कठोर परिश्रम से तैयार 72 वें रिपोर्ट में ऐसे कई तथ्यों को उजागर किया था । रिपोर्ट में सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित संस्थाओं की कड़ी आलोचना की गई थी, साथ ही पूरे वैक्सीन ट्रायल को बंद करने और स्वतंत्र जाँच के लिए भी निर्देश दिए गए थे

सांसद ने कहा कि दुर्भाग्य की बात तो यह है, कि 13 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक बिना स्वतंत्र जाँच के इस वैक्सीन को भारत के भीतर ना केवल बेचने की अनुमति दी गई बल्कि इसे मुफ़्त और अनिवार्य किया गया ।राजद सांसद ने यह भी कहा है कि समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एचपीवी वैक्सीन न केवल जानलेवा है, बल्कि व्यापक रूप से बाँझपन को भी बढ़ावा देता है ।


