6G, हाई-स्पीड इंटरनेट व इमेजिंग तकनीक की दिशा में ऑप्टिकल फाइबर की भूमिका हो सकती है अहम:- कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी
6G, हाई-स्पीड इंटरनेट व इमेजिंग तकनीक की दिशा में ऑप्टिकल फाइबर की भूमिका हो सकती है अहम:- कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी
6G, हाई-स्पीड इंटरनेट व इमेजिंग तकनीक की दिशा में ऑप्टिकल फाइबर की भूमिका हो सकती है अहम:- कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी
ऑप्टिकल फाइबर विश्व स्तर पर कम्युनिकेशन के क्षेत्र में ला सकता है क्रांति:- प्रधानाचार्य डॉ. शंभु कुमार यादव
इंटरनेट, चिकित्सा, रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर और सुरक्षित संचार सहित अन्य क्षेत्रों में ऑप्टिकल फाइबर का साबित होगा अहम स्थान:- डॉ. जे. आर. अंसारी
एम.एल.एस.एम. कॉलेज दरभंगा में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस:- “ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन हेतु एटॉमिक प्रोसेस, लेजर, नैनो मैटेरियल एवं टेराहर्ट्ज टेक्नोलॉजी” का हुआ शुभारंभ

जे टी न्यूज, ल.ना.मि.वि.वि. दरभंगा:- स्थानीय महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह मेमोरियल महाविद्यालय, दरभंगा में प्रधानाचार्य डॉ. शंभु कुमार यादव की अध्यक्षता में 13-14 मार्च 2026 को महाविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस “ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन हेतु एटॉमिक प्रोसेस, लेजर, नैनो मैटेरियल एवं टेराहर्ट्ज टेक्नालॉजी” का शुभारंभ किया गया। इस दौरान स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य डॉ. शंभु कुमार यादव ने अपने स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी, आगत अतिथि, शिक्षक, शोधार्थी व छात्र-छात्राओं का स्वागत व अभिनंदन करते हुए कहा कि किसी भी देश के विकास का पैमाना कम्युनिकेशन है और कम्युनिकेशन के लिये ऑप्टिकल फाइबर का आज सबसे ज्यादा प्रासंगिक है। ऑप्टिकल फाइबर विश्व स्तर पर कम्युनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। इसीलिए कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। ऑप्टिकल फाइबर का यूज कर हम कम्युनिकेशन को और तेज रफ्तार दे सकते हैं।

बतौर मुख्य अतिथि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि वर्तमान युग संचार क्रांति का युग है। इस युग में एटॉमिक प्रोसेस, लेजर तकनीक व टेराहर्ट्ज प्रौद्योगिकी की भूमिका काफी बढ़ जाती है। एटॉमिक प्रोसेस के अध्ययन से जहां संचार प्रणाली की क्षमता और दक्षता बढ़ती है। वहीं ऑप्टिकल फाइबर में डेटा भेजने के लिए लेजर प्रकाश स्रोत के रूप में प्रयोग होता है जिससे उच्च गति इंटरनेट, केबल टीवी और लंबी दूरी के संचार में लेजर अत्यंत आवश्यक है। वहीं नैनो टेक्नोलॉजी से बने पदार्थ ऑप्टिकल फाइबर की संवेदनशीलता, मजबूती और दक्षता को बढ़ाते हैं। निष्कर्षतः कहें तो 6G, हाई-स्पीड इंटरनेट व इमेजिंग तकनीक की दिशा में ऑप्टिकल फाइबर की भूमिका भविष्य में अहम साबित हो सकती है। अगर आप सब इस विषय पर पहल करें तो भविष्य में इस विषय पर एक वर्षीय एक डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जा सकता है, जिससे दरभंगा, मधुबनी सहित मिथिला व पड़ोसी राष्ट्र नेपाल को भी इसका फायदा मिलेगा।

बतौर मुख्य वक्ता योंसे विश्वविद्यालय, दक्षिण कोरिया के स्कूल ऑफ साइंस एन्ड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. जे. आर. अंसारी ने कहा कि आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के तीव्र विकास में ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में उभरा है क्योंकि आज इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग और वीडियो कॉल जैसी सेवाएँ तेज़ और भरोसेमंद संचार प्रणाली पर निर्भर हैं। इन सेवाओं को संभव बनाने में ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन की प्रमुख भूमिका है। इस प्रणाली को बेहतर बनाने में एटॉमिक प्रोसेस, लेजर, नैनो-मैटेरियल और टेराहर्ट्ज टेक्नोलॉजी का अहम भूमिका है। लेजर डेटा को प्रकाश के रूप में भेजने का माध्यम बनता है, नैनो-मैटेरियल उपकरणों की दक्षता बढ़ाते हैं और टेराहर्ट्ज तकनीक भविष्य की अत्यधिक तेज संचार प्रणालियों का मार्ग प्रशस्त करती है। इन सभी तकनीकों के संयुक्त उपयोग से ऑप्टिकल फाइबर कम्युनिकेशन अधिक तेज, विश्वसनीय और प्रभावी बनता जा रहा है, जिससे आधुनिक डिजिटल समाज की आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं। यह तकनीक उच्च क्षमता वाले इंटरनेट, चिकित्सा में उपयोग, रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर और सुरक्षित संचार अवसंरचना को सुनिश्चित करती है। आज नैनो मेडिकल साइंस को ही देखें तो इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं।

तकनीकी सत्र में जेएनयू के सहायक प्राध्यापक डॉ. आलोक सिंह झा, आईआईईएसटी कोलकाता की डॉ. कुमारी स्वाति, आईआईटी पटना के सह प्राध्यापक डॉ. नवीन निश्छल, नैनोटेक्नोलॉजी केंद्र के विभागाध्यक्ष सह एकेयू पटना के पूर्व कुलसचिव डॉ. राकेश कुमार सिंह व जेएनयू के डॉ. शिल्पी अग्रवाल आदि ने विस्तार से इस विषय पर तकनीकी सत्र में अपनी-अपनी बातों को रखा।
विषय प्रवेश भौतिकी विभाग के डॉ. वेद प्रकाश झा, मंच संचालन हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. सुप्रिता शालिनी व धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एम. ए. एच. नोमानी ने किया।
इस मौके पर परीक्षा नियंत्रक सह आय-व्यय पदाधिकारी नंद किशोर झा, सेमिनार के संयोजक सचिव डॉ. भारतेंदु कुमार, सह संयोजक डॉ. गोपाल चंद्र ठाकुर प्रकाश, संयुक्त सचिव डॉ. आनन्द मोहन झा, आइक्यूएसी समन्वयक डॉ. मनोज कुमार वर्मा, संयुक्त समन्वयक डॉ. रंजन कुमार, राष्ट्रीय सेवा योजना के यूनिट प्रथम व द्वितीय के कार्यक्रम पदाधिकारी क्रमशः डॉ. सुजीत कुमार साफी व डॉ. कुमार नरेंद्र नीरज, डिस्टेंस के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विवेक कुमार राय, असिस्टेंट डायरेक्टर मुकेश कुमार शर्मा, विश्वविद्यालय प्रेस प्रभारी डॉ. दिवेश कुमार शर्मा, हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. ज्वाला चंद्र चौधरी, मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. कुमुद कुमारी, मारवाड़ी कॉलेज के भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार सिंह सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक गण, शोधार्थी, कर्मी व सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्रा उपस्थित थे।





