बिहार छात्र आंदोलन की शुरुआत 16 मार्च 1974 में बेतिया गोली कांड से हुई थी
बिहार छात्र आंदोलन की शुरुआत 16 मार्च 1974 में बेतिया गोली कांड से हुई थी

जे टी न्यूज़, बेतिया : 16 मार्च 1974 को बेतिया में एस एफ आई के प्रदर्शन पर गोलियां चलाई गई थी। जिसमें 7 छात्र शहीद हुए थे। यह प्रदर्शन महंगाई, बेरोजगारी, वैज्ञानिक शिक्षा तथा भ्रष्टाचार के सवाल पर था। यह प्रदर्शन महारानी जानकी कुंवर महाविद्यालय से निकलकर बेतिया राज देवड़ी स्थित समाहरणालय पहुंचा।जहां सर्वप्रथम तत्कालीन पश्चिम चंपारण पुलिस अधीक्षक द्वारा अपनी पिस्तौल से गोली चलाई गई थी। जिससे एक छात्र मारा गया । उसके बाद गोलियों का चलना शुरू हो गया। देखते-देखते 7 छात्र शहीद हो गए और दर्जनों की तादाद में घायल लोगों को एम जे के अस्पताल बेतिया में भर्ती कराया गया था ।शाम 7 बजे बेतिया में कर्फ्यू लगा दी गई और बिहार में सर्व प्रथम माकपा के पश्चिम चंपारण जिला कमिटी के सचिव सत्येंद्र नारायण मित्र को गिरफ्तार कर लिया गया।यह गिरफ्तारी बिहार की पहली गिरफ्तारी थी।दूसरी गिरफ्तारी एम जे के कॉलेज बेतिया के प्रो. पी झा की हुईं।

जोसाम्यवादी विचार रखते थे। धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे बिहार में फैल गया और छात्र आंदोलन से जन आंदोलन में तब्दील हो गया। यह आंदोलन वर्षों चला। इसी बीच आपातकाल पूरे देश में लगा दी गई और लोगों के सारे राजनीतिक तथा मौलिक अधिकार छीन लिए गये। बोलने की आजादी पर पाबंदी लगा दी गई ।गिरफ्तारियां तेज हो गई। लेकिन यह आंदोलन बढ़ता ही गया ।अब यह आंदोलन बिहार से बढ़कर पूरे देश में स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जैसे स्वतंत्रता सेनानी और जुझारू व्यक्तित्व रखने वाले के नेतृत्व में फैल गया । उन्हीं के नेतृत्व में व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद के साथ आंदोलन आगे बढ़ता गया ।1977 में लोकसभा का चुनाव हुआ। देश की धिनायकवादी शक्ति तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भी पराजय हो गई।पूरे उत्तर भारत में एक भी सीट कांग्रेस को मयस्सर नहीं हुआ।

917 में चंपारण आकर मोहन दास करमचंद गांधी ने चंपारण के किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था।जो आंदोलन पूरे देश में फैल गया था और ब्रिटिश हुकूमत को जाना पड़ा था। चंपारण के युवाओं को एक बार जागना होगा।देश को अमेरिकी साम्राज्यवाद की गुलामी से बचाना होगा।देश की संप्रभुता को अक्षुण रखना होगा,बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित संविधान की रक्षा के लिए,जनतांत्रिक मूल्यों की हिफाजत के लिए,मौलिक अधिकारों को कायम रखने के लिए,देश में नफ़रत फैलाने वाली मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए ,गंगा यमनी तहजीब की हिफाजत के लिए चंपारण के नौजवानों ,किसानों , मजदूरों और महिलाओं को संघर्ष के लिए जगाना की जरूरत है। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता म. सहीम ने की।सभा को प्रभुनाथ गुप्ता,शंकर कुमार राव,प्रकाश कुमार वर्मा, म. हनीफ, मनोज कुशवाहा, म. शमी आलम ,राजीव कुमार नितेश कुमार,आर्यन कुमार ,अशर्फी चौधरी आदि ने संबोधित किया।




