किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आवाज बुलंद बड़े कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने का आरोप बिल को स्थायी समिति में भेजने की मांग “देश तब मजबूत होगा, जब आखिरी व्यक्ति मजबूत होगा”

किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आवाज बुलंद बड़े कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने का आरोप
बिल को स्थायी समिति में भेजने की मांग “देश तब मजबूत होगा, जब आखिरी व्यक्ति मजबूत होगा”

जे टी न्यूज़, नई दिल्ली : दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने संसद में जोरदार हस्तक्षेप करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि बैंकों में जमा पैसा सरकार या कॉरपोरेट का नहीं, बल्कि देश की जनता की मेहनत की कमाई है—ऐसे में किसी को भी “खाली चेक” नहीं दिया जा सकता। सांसद ने कहा कि प्रस्तावित कानून से बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचने का खतरा है, जबकि किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना संतुलित प्रावधानों के यह बिल आम लोगों के हितों के खिलाफ जा सकता है। पप्पू यादव ने सीमांचल और पूर्णिया के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार युवाओं को उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करती है, वहीं दूसरी ओर छोटे उद्यमियों और गारंटरों पर सख्ती की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्राकृतिक आपदा, वैश्विक संकट या आर्थिक मंदी के कारण प्रभावित व्यवसायों के लिए अलग और व्यवहारिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही। नोटबंदी और कोरोना काल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में छोटे व्यापारी और सप्लायर सबसे ज्यादा टूटे, जबकि बड़े उद्योग घरानों को अपेक्षाकृत लाभ मिला। उन्होंने कहा कि बिहार और खासकर पूर्णिया के हजारों छोटे व्यवसाय आज भी उस संकट से उबर नहीं पाए हैं। सांसद ने न्याय व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि महंगा और जटिल कानूनी ढांचा आम आदमी की पहुंच से बाहर है।

उन्होंने मजदूरों के बकाये भुगतान को प्राथमिकता देने, महिलाओं और जीविका समूहों के ऋण में राहत देने तथा ईमानदार उद्यमियों को दूसरा मौका देने की मांग की। अंत में पप्पू यादव ने जोर देकर कहा कि इस विधेयक को संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए, ताकि व्यापक समीक्षा के बाद ही इसे पारित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब अंतिम व्यक्ति—किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी और युवा—सुरक्षित और सशक्त होगा।

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