- विक्रमशिला सेतु का गिरना – एनडीए सरकार के

- विकास मॉडल की हकीकत
- जे टी न्यूज़, पटना : कल रात विक्रमशिला सेतु के स्लैब गिरने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि यह एनडीए सरकार के विकास मॉडल का सबसे घटिया और घृणित चेहरे का एक नमूना है। अति व्यस्त रहने वाली इस पूल के प्रोटेक्शन वॉल खिसकने की जानकारी महिनों पूर्व होने के बावजूद भी इसकी मरम्मती को केवल इसलिए नजरंदाज किया गया क्योंकि यह पूल राजद सरकार की देन है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद 15 नवम्बर 1990 को लालू प्रसाद जी ने इस पूल का शिलान्यास किया था और 167.50 करोड़ की लागत से बने इस पूल का उद्घाटन जुलाई 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी ने किया था।
- राजद प्रवक्ता ने कहा कि यह तो गनिमत था कि जिस वक्त स्लैब गीरा उस वक्त उस स्लैब पर कोई गाड़ी नहीं थी। साथ हीं स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना के चंद मिनट पहले ऐहतियाती कदम उठाई वरना कितनी गाड़ियां गंगा जी में समा जाती।
- राजद प्रवक्ता ने कहा कि जिस एनडीए सरकार के विकास मॉडल में पूलों के गिरने का अभूतपूर्व रिकॉर्ड है। जिसके शासनकाल में एक दिन में 5-5 पूल और दो सप्ताह के अंदर दर्जन भर पूल गिरने का शानदार उपलब्धि रहा है। वह अपने पूर्ववर्ती सरकार जिसके बारे में वह नकारात्मक प्रचार कर लोगों को गुमराह करती रही है, उस सरकार के समय बने पूल को बगैर उचित रखरखाव के भी उसके टिकाउपन को कैसे पचा सकती है। राजद शासनकाल में 2001 में चालू हुए उस पूल के रख-रखाव पर 2017 तक एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया था। पहली बार 2017 में उसके जिर्णोद्धार के नाम पर 16 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। 2020 में भी जिर्णोद्धार का प्रस्ताव भेजा गया था पर कुछ हुआ नहीं। अभी कुछ दिन पहले प्रोटेक्शन वॉल खिसकने का मामला भी उठाया गया पर सुशासनी मॉडल की सरकार सोयी रही। और पूल का स्लैब गीर गया। यही है एनडीए सरकार का सुशासनी मॉडल जहां लोगों के जान-माल की किमत पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जाती है।
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