मछली के साथ मोती पालन व्यवसाय वरदान: कुलपति, डॉ वज़ीर सिंह लाकड़ा ने तकनीकी ज्ञान अपनाने पर दिया जोर

मछली के साथ मोती पालन व्यवसाय वरदान: कुलपति, डॉ वज़ीर सिंह लाकड़ा ने तकनीकी ज्ञान अपनाने पर दिया जोर

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ मात्स्यिकी महाविद्यालय के तत्वावधान में तिरहुत कृषि महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में “मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीकों का प्रदर्शन” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. वज़ीर सिंह लाकड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति डॉ. पांडेय ने कहा कि बिहार में जल संसाधनों की प्रचुरता के कारण मछली पालन के साथ मोती पालन व्यवसाय किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के इस दौर में गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की आवश्यकता है और मोती उत्पादन इस दिशा में एक नया विकल्प प्रस्तुत करता है। उन्होंने विशेष रूप से “जीविका दीदियों” की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं के हाथों में यह तकनीक पहुंचने से आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी। मुख्य अतिथि डॉ. वज़ीर सिंह लाकड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षु यदि इस तकनीकी ज्ञान को व्यवहार में उतारें तो वे मीठे पानी में मोती पालन के माध्यम से अच्छी आमदनी अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक आधारित उद्यमिता ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।

अधिष्ठाता डॉ. पी.पी. श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में बताया कि इस प्रशिक्षण में अनुसूचित जाति वर्ग की महिला प्रतिभागी भाग ले रही हैं, जिन्हें मछली पालन के साथ मोती उत्पादन की उन्नत तकनीक सिखाई जा रही है। उन्होंने इसे आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया।

निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न परियोजनाओं पर अनुसंधान कार्य शुरू किया गया है और प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के बाद उद्यमिता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। वहीं अधिष्ठाता डॉ. पी.पी. सिंह ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के ज्ञान को धरातल पर लागू करने की सलाह दी।

कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डॉ. राम कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परियोजना समन्वयक आदिता शर्मा ने किया। इस अवसर पर जीविका से जुड़ी डॉ. अमीषा, डॉ. अर्चना सहित कई वैज्ञानिक, अधिष्ठाता और निदेशक उपस्थित थे।

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