बीजेपी सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनता के मौलिक अधिकारें को समाप्त कर रही -राम सुदिष्ट यादव

बीजेपी सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनता के मौलिक अधिकारें को समाप्त कर रही -राम सुदिष्ट यादव

जे टी न्यूज़, मधुबनी : इन दिनों साल 2029 से पहले देश की डेमोक्रेसी, जनता की वोट के अधिकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनता के मौलिक अधिकारें सभी के सभी बीजेपी सरकार में समाप्त होती जा रही है। इस सरकार में जवाब देही नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। देश में बड़े-बड़े घटनाएं हो रही है, कई आतंकी घटनाएं भी हुई । लेकिन सरकार में बैठे लोग न स्वयं जवाब देही लेती है और ना किसी व्यूरोक्रेसी को जवाबदेही देती है। इस से लगता है हर घटना-दुर्घटना के पीछे सरकार का हाथ स्वयं हो ? सन् 1977 के पहले की स्थिति से कयी गुणा खराब हालत में देश पहूंच गया है। लेकिन देश के राजनीतिक पार्टियां केवल पद-प्रतिष्ठा, सत्ता पाने के आशा लगाए बैठे हैं। जब से बीजेपी सत्ता में आई है तब से कई क्षेत्रीय पार्टियां को जमींदोज कर दी है। पंजाब के अकाली दल, हरियाणा के लोकदल, यूपी के बसपा, महाराष्ट्र के शिव सेना, एनसीपी, कर्नाटक को जनता दल (एस), उड़ीसा के नवीन पटनायक, बिहार में जनता दल यूनाइटेड (नीतीश कुमार) को अभी तक भाजपा अपने सहयोगियों को निगल चुका है। फिर भी बिहार के कुछ क्षेत्रीय पार्टियां लोजपा, राष्ट्रीय लोक समता उपेन्द्र कुशवाहा, हम पार्टी के जीतनराम मांझी, यूपी के अपना दल, संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर, रामदास अठारहवें आदि भाजपा के मुंह के आगे भींगी बिल्ली की तरह खड़ा है। इन लोगों की लीला कभी भी समाप्त कर देगी। 2019 तक चुनाव आयोग की जिम्मेदारी थी कि हरेक 18 वर्ष आयु के युवाओं को खोज-खोज कर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना। अब भाजपा के समर्थन से नियुक्त चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार को कानूनी कवच दे दिया गया है कि वे कुछ भी संवैधानिक या गैर-संवैधानिक निर्णय लेंगे तो उनके कार्य के खिलाफ किसी भी न्यायालय में मुकदमा नहीं किया जा सकता है, अवकाश प्राप्त के बाद भी । इस रक्षा कवच का चुनाव आयोग धरल्ले से दुरूपयोग कर रहा है । गैर संवैधानिक निर्णय लगातार ले रहे हैं।भाजपा को जीताने केलिए वोटर लिस्ट से स्थानीय वोटर का नाम जो विपक्षी पार्टी के समर्थक हैं का “एस आई आर ” के नाम पर वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर काटने का काम किया है । वहीं दूसरे राज्यों के फर्जी वोटर का नाम जोड़ा जाता है। ऐसी सिस्टम में कोई पार्टी सत्ताधारी पार्टी को कैसे हरा पाएंगी?

पहले वोटर प्रतिनिधि को चुनता था। अब चुनाव आयोग प्रतिनिधि को चुनने लगा है । इसलिए अब चुनाव आयोग के मर्जी से ही कोई प्रतिनिधि बन पायेंगा। यह डेमोक्रेसी की दिनदहाड़े हत्या की जा रही है । बिहार व बंगाल चुनाव इसी तर्ज पर चुनाव आयोग जीताकर भाजपा को सत्ता में लाई है । अब इस संकट से बचने केलिए एक मात्र उपाय है कि करो और मरो के संकल्प के साथ आंदोलन सभी विपक्षी पार्टियों के समर्थकों एक साथ मिल कर सड़क पर उतरें , तब तानाशाही सत्ता जनता की बात सुनेंगी ।

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