रेलवे में ‘आपातकालीन कोटा’ बना मुसीबत: माफिया राज का लगा आरोप, धमकियों से खौफ में रेल कर्मी।

मामला पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर रेल मंडल में निर्धारित ट्रेनों के आपातकालीन कोटा का ।

रेलवे में ‘आपातकालीन कोटा’ बना मुसीबत: माफिया राज का लगा आरोप, धमकियों से खौफ में रेल कर्मी।

मामला पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर रेल मंडल में निर्धारित ट्रेनों के आपातकालीन कोटा का

जेटीन्यूज
समस्तीपुर : पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर रेल मंडल में ट्रेनों के आपातकालीन कोटा के आवंटन को लेकर एक बड़ा और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जरूरतमंद यात्रियों और जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित इस विशेष कोटे पर टिकट माफिया का कब्जा हो चुका है, जिसके कारण रेल अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी मानसिक तनाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में भारी संख्या में जनप्रतिनिधि होने के बावजूद इस मंडल से लंबी दूरी की ट्रेनों में खुलने वाला आपातकालीन कोटा (EQ) ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सीमित सीटों के कारण मंडल रेल प्रबंधक और वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) के सामने रोजाना ‘सांप-छूछूंदर’ जैसी असहज स्थिति बनी रहती है। समस्तीपुर मंडल में जो सीमित वीआईपी कोटा उपलब्ध भी है, उसका एक बड़ा हिस्सा दलालों के नेटवर्क के जरिए गायब कर दिया जाता है। आरोप है कि महाप्रबंधक कार्यालय हाजीपुर और दिल्ली स्थित रेल भवन में बैठे कुछ रसूखदार लोगों व दलालों के गठजोड़ के कारण आपातकालीन सीटें समस्तीपुर पहुंचने से पहले ही ऊंचे दामों पर बेच दी जाती हैं। कई रेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि वे समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी के स्थानीय सांसदों के वैध आपातकालीन पत्रों पर भी सीटें आवंटित करने में असमर्थ हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि दरभंगा के एक माननीय सांसद द्वारा समस्तीपुर रेल मंडल से दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों के लिए रोजाना भारी संख्या में आपातकालीन कोटा पत्र भेजे जाते हैं। यदि सीटों की कमी के कारण किसी दिन कोटा उपलब्ध नहीं हो पाता, तो रेल कर्मियों को फोन पर अभद्र भाषा और गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि नेताओं के कथित गुर्गों द्वारा रेल कार्यालयों में आकर उन्हें सीधे तौर पर धमकाया जाता है। डर के मारे कर्मचारियों ने कराया ट्रांसफर नेताओं और उनके समर्थकों के इस लगातार बढ़ते दबाव, गाली-गलौज और आपराधिक धमकियों के कारण आपातकालीन आरक्षण कार्यालय (EQ Cell) में तैनात कई रेल कर्मचारी गहरे खौफ में हैं। बताया जा रहा है कि इस मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर कई पुराने और अनुभवी रेल कर्मियों ने इस विभाग से अपना तबादला अन्य जगहों पर करवा लिया है। इसके साथ ही क्षेत्र में सांसदों के फर्जी लेटर पैड छपवाकर धड़ल्ले से बेचने वाले गिरोह के सक्रिय होने की भी आशंका जताई जा रही है।’दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की मांग इस पूरे घटनाक्रम के बाद रेलवे की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि यदि रेलवे प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि पूरी तरह पाक-साहब हैं, तो मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को पिछले एक वर्ष के दौरान निर्गत किए गए सभी आपातकालीन कोटे की सूची को सार्वजनिक करना चाहिए। इस रिकॉर्ड के सामने आने से यह साफ हो सकेगा कि पिछले एक साल में किन-किन यात्रियों को किसकी अनुशंसा पर सीटें दी गईं और इस खेल के पीछे असली चेहरा किसका है?

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