परिंदों सी तो काया है
परिंदों सी तो काया है
जे टी न्यूज़

फिर घमंड किस बात की
रह जायेंगे सब धरे के धरे
इसी धरा पर
क्यों फिर शानों शौकत पे अभिमान है
मुसाफिर हैं यारों हम सब
इसी गलियारे की
एक दिन सफर तो करना है ही
फिर क्यों हकीकत से हैरान हैं।
दिव्यानी राज मंजु

