ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में परिचय-सह-सम्मान समारोह संपन्न

सेवाभाव से कार्य करें, महाविद्यालय की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाएं : प्रो. कैलाश यादव

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय में परिचय-सह-सम्मान समारोह संपन्न

सेवाभाव से कार्य करें, महाविद्यालय की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाएं : प्रो. कैलाश यादव

जे टी न्यूज, मधेपुरा :

ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में बुधवार को बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग, पटना के माध्यम से नियुक्त नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के स्वागत में परिचय-सह-सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय के शिक्षकीय गरिमा, परंपरा और नवप्रवेशी शिक्षकों के उत्साह का सजीव प्रतीक बन गया।

 

*सेवाभाव ही श्रेष्ठ शिक्षक का मूल गुण – प्रधानाचार्य*

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उनका इस महाविद्यालय से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। वे इसी संस्था के पूर्व छात्र रहे हैं और यहीं शिक्षक के रूप में कार्य कर चुके हैं। आज उन्हें इसी महाविद्यालय में प्रधानाचार्य के रूप में सेवा का अवसर मिलना गर्व की बात है।

 

उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे सेवाभाव को केंद्र में रखकर कार्य करें, कक्षाओं को जीवंत बनाएँ और महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की प्रतिष्ठा को बनाए रखना और उसे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

*महाविद्यालय का गौरवशाली इतिहास : डॉ. रत्नदीप*

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षक संघ अध्यक्ष एवं रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. रत्नदीप ने कहा कि ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय का एक गौरवशाली अतीत रहा है। यहां से कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद, विधायक, सांसद तथा कुलपति जैसे पदों तक पहुँचे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की नींव भी इसी महाविद्यालय के परिसर में रखी गई थी, और इसके प्रथम कुलपति प्रो. रमेन्द्र कुमार यादव रवि भी इसी संस्था से जुड़े रहे थे।

 

*काव्य से सजी नई शुरुआत*

 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पगुच्छ अर्पण के साथ हुई। इस अवसर पर डॉ. मधुनंदा (मनोविज्ञान विभाग) ने अपनी प्रेरणास्पद कविता ‘एक नई शुरुआत’ प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।

 

*नवचयनित शिक्षकों का सम्मान*

 

इस अवसर पर डॉ. कुमार सौरभ, संजीव कुमार सुमन (हिंदी), डॉ. राकेश कुमार, डॉ. मधुनंदा (मनोविज्ञान), डॉ. कुमार गौरव (अर्थशास्त्र) एवं डॉ. रीना कुमारी (भौतिकी) को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। सभी सम्मानित शिक्षकों ने अपने विचार साझा किए और स्वागत-सम्मान के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

 

*उत्साहपूर्ण भागीदारी व संचालन*

 

कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. वीणा कुमारी (हिंदी विभागाध्यक्ष) ने दिया, संचालन डॉ. सुधांशु शेखर (दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष) ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्वर्णमणि (इतिहास विभागाध्यक्ष) द्वारा किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक विभागों के शिक्षक उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से—डॉ. मिथिलेश कुमार (राजनीति विज्ञान), डॉ. दीपक कुमार राणा (अर्थशास्त्र), डॉ. मनोज कुमार यादव, डॉ. उपेन्द्र प्रसाद यादव, डॉ. रोहिणी, डॉ. यासमीन रसीदी, डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, डॉ. शहरयार अहमद, डॉ. मनोज ठाकुर, डॉ. हरित कृष्णा, डॉ. अंकेश कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. मीनू सोढ़ी, स्वीटी सिन्हा, डॉ. सीमा कुमारी आदि शामिल थे।

समर्पण और सहभागिता का एक प्रेरणादायी उदाहरण*

यह आयोजन न केवल नवचयनित शिक्षकों के लिए सम्मान का अवसर था, बल्कि शैक्षणिक सहयोग, भावनात्मक जुड़ाव और सामूहिक प्रतिबद्धता का भी जीवंत उदाहरण बन गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब शिक्षक सेवाभाव के साथ कार्य करें, तो संस्था केवल इमारत नहीं, बल्कि ज्ञान का जीवंत केंद्र बन जाती है।

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