विज्ञान के विकास के बिना समाज का विकास संभव नहीं – संतोष के कर बिहार समाज विज्ञान

अकादमी के महासचिव सह चतुर्थ बिहार सामाजिक विज्ञान कांग्रेस के तत्वावधान में शनिवार को दो दिवसीय सम्मेलन आरंभ समस्तीपुर। जिले के रोसड़ा स्थित

विज्ञान के विकास के बिना समाज का विकास संभव नहीं – संतोष के कर
बिहार समाज विज्ञान अकादमी के महासचिव सह चतुर्थ बिहार सामाजिक विज्ञान कांग्रेस के तत्वावधान में शनिवार को दो दिवसीय सम्मेलन आरंभ
समस्तीपुर। जिले के रोसड़ा स्थित


यूआर कॉलेज परिसर में बिहार समाज विज्ञान अकादमी के महासचिव सह चतुर्थ बिहार सामाजिक विज्ञान कांग्रेस के तत्वावधान में शनिवार को दो दिवसीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र एवं पांच तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उद्घाटन सत्र में सर्वप्रथम प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम राय ने मंचासीन अतिथियों का मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। तदुपरांत मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया। पुन: महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा स्वागत गान के उपरांत बिहार समाज विज्ञान अकादमी के महासचिव सह चतुर्थ बिहार सामाजिक विज्ञान कांग्रेस के संयोजक सह प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम राय ने स्वागत भाषण दिया।

उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता प्रोफेसर संतोष के कर ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि समाज विज्ञान से जुड़ा हुआ है। इसलिए विज्ञान के विकास के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने हल्दी के अनेक उपयोगों और प्रयोगों की चर्चा की।
उन्होंने हल्दी के एक तत्व कुरकुरे की चर्चा की और जैव प्रौद्योगिकी के परिप्रेक्ष्य और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के बारे में बताया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रोफेसर डीएम दिवाकर ने कहा कि समाज के संदर्भ में विज्ञान को समग्र रूप से देखने की जरूरत है। जिसमें उन्होंने थॉमस क्रूज के साधारण विज्ञान और क्रांतिकारी विज्ञान की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हुए विज्ञान को परिभाषित किया। उन्होंने कार्ल पॉपर की पुस्तक डिस्कवरी ऑफ साइंटिफिक लॉजिक की भी चर्चा की। इस दौरान प्रोफेसर अनिल दत्त मिश्रा ने समाज में किए गए कार्यों की चर्चा की और आध्यात्मिक ज्ञान को जोड़कर सामाजिक विकास पर चर्चा की। वहीं प्रोफेसर मुनेश्वर यादव ने अंतःविषयी दृष्टिकोण, बहुविषयी दृष्टिकोण और प्रबंधन पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि और उद्घाटनकर्ता प्रोफेसर रमाशंकर आर्य ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन बर्सर डॉ. बिनय कुमार ने कियाl

मंच संचालन डॉ विनय कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। बताते चलें कि
इस सम्मेलन में देशभर से करीब ढाई सौ पत्र प्राप्त हुए। उद्घाटन सत्र के बाद पांच समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। अपने संबोधन में बासा के महासचिव व यूआर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. घनश्याम राय ने बताया कि दूसरे दिन रविवार की सुबह 10.30 बजे से पांच तकनीकी समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही शैक्षणिक सत्र भी आयोजित किया जाएगा। दोपहर एक बजे से दो बजे तक डॉ. एसपी वर्मा स्मृति व्याख्यान होगा। एसपी वर्मा व्याख्यान के मुख्य वक्ता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजमणि प्रसाद सिन्हा होंगे। समापन समारोह दोपहर तीन बजे से साढ़े चार बजे तक होगा।

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