घोषित आपातकाल से अघोषित आपातकाल तक
घोषित आपातकाल से अघोषित आपातकाल तक
जे टी न्यूज़, पटना।आज भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की बिहार राज्य कार्यालय ,जमाल रोड पटना में पटना शहर कमिटी द्वारा घोषित आपातकाल से अघोषित आपातकाल तक विषय पर विमर्श का आयोजन हुआ। सर्व प्रथम विमर्श की शुरुआत करते हुए पार्टी की बिहार राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने बताया कि बिहार में छात्र आंदोलन की शुरुआत 16 मार्च 1974 को बेतिया में हुए एस एफ आई (SFI) के प्रदर्शन से शुरु हुई।उस प्रदर्शन पर बेतिया समाहरणालय में गोलियां चलाई गई।जिसमें 7 छात्र शहीद हो गए।वह आंदोलन महंगाई ,बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार और शिक्षा में आमूल परिवर्तन के मांग को लेकर हुआ था। उस गोली काण्ड के दो दिन बाद 18 जुलाई को पटना में छात्रों की जुलूस पर गोली चलाई गई।यह आंदोलन सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रहा ।बल्कि पूरे देश में फैल गया। यह आंदोलन अब जन आंदोलन का रुप धारण कर लिया।इस आंदोलन में लाखों लोगों की गिरफ्तारियां हुई।पूरा विपक्ष जेलों में कैद हो गया। जनता की आवाज दबाने के लिए ,आज ही के दिन 26 जून 1975 को इन्दिरा गांधी ने आपातकाल लागू कर दिया।बोलने की आजादी छीन ली गई।उसका नतीजा यह हुआ कि 1977 में हुए लोक सभा चुनाव में पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिला।इस तरह कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी की सरकार बनी। लेकिन आज देश में अघोषित आपातकाल लागू है।मोदी सरकार में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है।देश में धार्मिक उन्माद पैदा किया जा रहा है।नफरत का माहौल बनाया जा रहा है।आज जरूरत है इस संविधान विरोधी सरकार को हराया जाए।तभी देश बच पाएगा।
विमर्श को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात मार्क्सवादी चिंतक अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि उस समय आपातकाल संविधान के तहत लगा था।लेकिन आज मोदी सरकार संविधान को दर किनार कर मनमाने ढंग से मनु स्मृति को देश में थोपा जा रहा है।जिस आर एस एस के बाला साहब देवरस ने आपातकाल का समर्थन किया था।आज वहीं देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रहे हैं। का. मंजुल कुमार दास ने कहा कि आज अघोषित आपातकाल के खिलाफ सड़कों पर उतरना ही होगा।हमें अनेकता में एकता को और मजबूत करना होगा। विजय कुमार सिंह शिक्षक संघ ने कहा कि आपातकाल को हमने बहुत नजदीक से देखा है।जब मैं जेल में था ।तो मेरे पिता जी जेल में एक फॉर्म लेकर आए और बोले कि इस पर लिख दो कि मुझे आपातकाल से कोई मतलब नहीं है।तो तुम्हारा बेल हो जाएगा।मैने कहा था कि उसी आपातकाल के खिलाफ तो जेल आया हूं।पार्टी के बिहार राज्य सचिव मंडल सदस्य अहमद अली ,अनुपम कुमार,देवेंद्र चौरसिया,किशोर कुमार आदि ने अपनी विचारों को रखा।



