कृषि,श्रमिक विरोधी काले कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी को वाहन मार्च

कृषि,श्रमिक विरोधी काले कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी को वाहन मार्च

जे टी न्यूज, बेतिया: बिहार राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष, बिहार राज्य ईख उत्पादक संघ के महासचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि 26 जनवरी को राष्ट्रव्यापी ट्रैक्टर / वाहन मार्च निकाला जाएगा । उस दिन हम एमएसपी को कानूनी दर्जा देने, किसानों के कृषि कर्ज को समाप्त करने, बीज विधेयक 2025 को वापस लेने,बिजली विधेयक 2025 को वापस लेने,4 श्रम संहिता कानून को वापस लेने,मनरेगा कानून को बहाल करने, स्मार्ट मीटर को समाप्त करने आदि मांगों को लेकर 26 जनवरी को पश्चिम चंपारण के जिला मुख्यालय बेतिया में वाहन मार्च निकाला जाएगा ।


उन्होंने बताया कि आज देश के किसानों की स्थिति लगातार खराब करने की नीयत से केंद्र सरकार काम कर रही है। वह चाहती है कि किसानों की जमीनों को कॉरर्पोरेट के हाथों में दे दिया जाए। जिस तरीके से देश के सार्वजनिक संस्थाओं को, उद्योगों को कॉरर्पोरेट के हाथ में सौंप दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हमें इसके खिलाफ उस ऐतिहासिक किसान आंदोलन की राह को एक बार फिर पकड़ना होगा ।जो 26 नवंबर 2020 को दिल्ली चलो का आह्वान किसानों ने किया था और मोदी सरकार ने दिल्ली जाने से रोकने का काम किया था ।जिसके चलते सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर ,गाजीपुर बॉर्डर, पलवल बॉर्डर आदि स्थानों पर किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए थे और यह आंदोलन 13 महीने तक चला था।जिसमें 736 किसान शहीद हो गए थे ।जो 9 दिसंबर 2021 को किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानून की वापसी की घोषणा के बाद और बाकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन प्रधानमंत्री द्वारा देने के बाद किसानों ने उस आंदोलन को स्थगित करके घर को लौटे थे ।


उन्होंने बताया कि एक बार फिर मोदी सरकार उन्हें तीनों काले कृषि कानून को लागू करने की साजिश में लगी हुई है और उसी का नतीजा है बीज विधेयक 2025 ,बिजली विधेयक 2025 को लोक सभा में पारित कर कानून बनाना।
उन्होंने कहा कि खेत मजदूरों के भारी संघर्ष करने के बाद मनमोहन सिंह की सरकार ने खेत मजदूरों को 100 दिन काम देने की गारंटी की थी। जिसको मनरेगा के नाम से जाना जाता है ।आज खेत मजदूर के लिए कोई नए कानून बनाने के बदले उस कानून में बदलाव कर 40% हिस्सा राज्य सरकारों को चुकाने का कानून बनाया है और उस मनरेगा का नाम बदल कर वी बी जी रामजी रख दिया है। ठीक उसी तरीके से ट्रेड यूनियन मजदूर के लिए बनाए गए 44 श्रम संहिताओं को समाप्त कर दिया है ।जिसमें अपनी मांगों के लिए जुलूस, प्रदर्शन ,हड़ताल ,बंद आदि करने का जनतांत्रिक अधिकार प्राप्त था। प्रबंधन के सामने तालाबंदी करने का अधिकार प्राप्त था। सारे अधिकारों को समाप्त कर चार श्रम संहिता कानून बनाया है।

जो मजदूरों के सारे अधिकारों को छीन लेता है। उन्होंने कहा कि इसीलिए हमें अपने आंदोलन को और तेज करना है और संघर्ष के बल पर समाधान तक पहुंचना है।

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