गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा को गांव गांव तक पहुंचाने की मुहिम
गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा को गांव गांव तक पहुंचाने की मुहिम

जे टी न्यूज, बहेरी/दरंभगा :
इन दिनों बिहार सरकार ने गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा को गांव गांव तक पहुंचाने की मुहिम छेड़ रखी है। इस के तहत सरकार वर्तमान में संचालित विद्यालय–महाविद्यालयों को उत्क्रमित करने की कवायद में जुटी है। बेशक यह सोच अच्छी है मगर, विद्यालय–महाविद्यालयों के हालात पर नजर डालने पर सरकार की तमाम कोशिशें महज कागजी कार्रवाई प्रतीत होती हैं। धरातल पर छात्रों को इससे कोई खास फायदा होता नजर नहीं आ रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब हमारे संवाददाता ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय अंतर्गत संचालित दरभंगा के बहेड़ी स्थित बी. एम. ए. कॉलेज का दौरा किया। वहां के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कुशेश्वर प्रसाद यादव ने बताया कि वर्तमान में स्नातक की शिक्षा प्रदान कर रहे इस महाविद्यालय में विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर तक शिक्षा आरम्भ करने का स्थानीय शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों व जनप्रतिनिधियों का दबाव बढ़ रहा है। इस संदर्भ में विश्वविद्यालय से उपलब्ध संसाधनों की विवरणी सहित शपथ पत्र की मांग की गई है। मगर मौजूदा हालात ये हैं कि, एक दो विषयों को छोड़ कर महाविद्यालय में न तो छात्र–शिक्षक अनुपात में पर्याप्त शिक्षक हैं, न पर्याप्त कक्ष और न ही प्रयोगशाला और उपस्कर। ऐसे में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा दूर की कौड़ी ही प्रतीत होती है। हालांकि, प्राचार्य ने, संबंधित विभागों के संकाय सदस्यों से प्राप्त लिखित आश्वासनों के आधार पर, “बी.एम.ए. कॉलेज, बहेरी (दरभंगा) में प्रस्तावित पाठ्यक्रमों/विभागों में स्नातकोत्तर शिक्षण वर्तमान शिक्षण स्टाफ, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की स्थिति और सुविधाओं को उन्नत करके स्नातकोत्तर तक अध्ययन शुरू किया जा सकता है” नोट लगा कर शपथ–पत्र विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पर्याप्त शिक्षक व संसाधनों के आभाव के बावजूद बी एम ए कॉलेज बहेड़ी में स्नातकोत्तर की शिक्षा आरम्भ होती है या पहले तमाम संसाधन व उपस्कर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके पूर्व सरकार के उत्क्रमण अभियान पर नजर डालें तो उत्क्रमित करने के पीछे सरकार की नीयत में खोट साफ झलकता है। जी हां! पूर्व में सरकार ने बिना किसी आकलन के या कहें, उपलब्ध संसाधनों के स्थिति की अनदेखी करते हुए, प्रायः सभी प्राथमिक विद्यालयों को मध्य विद्यालय, मध्य विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालय और माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रोन्नत या कहें उत्क्रमित कर चुकी है। जबकि हकीकत ये है कि अधिकांश विद्यालयों में न तो प्रोन्नति के अनुरूप वहां न तो पर्याप्त कक्ष उपलब्ध हैं, न छात्र–शिक्षक अनुपात में पर्याप्त विषयवार शिक्षक ही उपलब्ध हैं। इस आधार पर तो बी एम ए कॉलेज की कहानी में कोई बड़ा और वास्तविक बदलाव होता नहीं दिख रहा है।


