राय टोला वार्ड 12 में शिवा की जयंती मनाई गई

राय टोला वार्ड 12 में शिवा की जयंती मनाई गई

जे टी न्यूज, सहरसा: एक ऐसे महान राजा, एक असाधारण योद्धा और एक दूरदर्शी प्रशासक की जयंती है, जिनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है – छत्रपति शिवाजी महाराज।

मित्रों, शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को शिवनेरी के दुर्ग में हुआ था। उस समय का भारत मुगलों के अधीन था और दक्षिण में आदिलशाही का शासन था। ऐसे विषम परिस्थितियों में, शिवाजी महाराज ने एक ऐसे स्वराज्य की नींव रखी, जो न केवल शक्तिशाली था, बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा-पालक भी था।

हम शिवाजी महाराज से बहुत कुछ सीख सकते हैं:*

* *पहला गुण है उनका साहस और अदम्य साहस*। उन्होंने बाल्यावस्था से ही यह सीख लिया था कि स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। तोरणा के किले पर कब्जा करके उन्होंने स्वराज्य स्थापना का बिगुल बजा दिया। प्रतापगढ़ के युद्ध में अफजल खान जैसे विशालकाय और क्रूर सेनापति को उन्होंने अकेले दम पर मात दी। यह साहस हम सबके लिए प्रेरणा है कि चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती हो, उसका सामना सूझ-बूझ और हिम्मत से किया जा सकता है।

* *दूसरा गुण है उनकी कूटनीति और दूरदर्शिता।* शिवाजी महाराज ने गनिमी कावा (छापामार युद्ध नीति) को अपनाया और दुर्गों (किलों) के महत्व को समझा। उन्होंने न सिर्फ किले जीते बल्कि उन्हें सुरक्षित और सुव्यवस्थित भी रखा। उनकी नौसेना इतनी मजबूत थी कि वे समुद्री रास्तों पर भी नियंत्रण रखते थे। औरंगजेब के दरबार से उनका वीरतापूर्ण भागना उनकी सूझबूझ और त्वरित निर्णय क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण है।

* *तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण गुण है उनका प्रजाप्रेम और धार्मिक सहिष्णुता।* शिवाजी महाराज एक आदर्श राजा थे। वे अपनी प्रजा को ‘माझे बाळ’ (मेरी संतान) कहते थे। उनके राज्य में किसान सुरक्षित थे, व्यापारी समृद्ध थे। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया। उनके राज्य में मस्जिदें बनीं, और मुस्लिम संतों को भी आदर दिया गया। उन्होंने कभी किसी के धर्म में हस्तक्षेप नहीं किया। यह उदारता और समावेशिता ही उनके शासन की सबसे बड़ी विशेषता थी।

साथियों, शिवाजी महाराज ने दिखाया कि एक सच्चा नेता वही है जो जनता के लिए जिए, उनकी रक्षा करे और उन्हें न्याय दिलाए। उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची वीरता केवल युद्ध में ही नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों में भी होती है।

आज हम उन्हें नमन करते हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। आइए, हम भी अपने जीवन में साहस, नेतृत्व, न्यायप्रियता और सबके प्रति सम्मान के उनके आदर्शों को उतारें।
उपस्थित, कुन्दन कुमार, प्रशांत प्रदर्शीय, रामा नन्द पटेल मौसम वैज्ञानिक, अशोक कुमार , शिबू राय, दीना नाथ पटेल, बीटू कुमार, श्याम कुमार, गोबिंद राय, दीप नारायण राय, पटेल सेवा संघ के बहुत साथी एवं युवा इत्यादि उपस्थित थे

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