एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं महिलाएं महिला सशक्तिकरण का नारा धोखा 5 अप्रैल को महिला संगठनों की ओर आयोजित की जाएगी सभा जे टी न्यूज, पटना: महिला संगठनों की एक संयुक्त जांच टीम जिसमें अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन, ऐपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज चौबे, ऐडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामपरी, विहार महिला समाज की पटना जिला सचिव कृष्णा देवी व कार्यकारिणी सदस्य रिकू कुमारी, बिहार महिला समाख्या की रत्ना, इबतिदा नेटवर्क, बिहार की अख्तरी बेगम व महिला दलित विकास मंच की प्रतिमा शामिल थीं, नालंदा जिला के नूरसराय थाना के अजयपुर गांड का दौरा किया. अजय पुर में 26 मार्च की शाम सरेआम एक महिला को गुण्डों ने सामूहिक बलात्कार की कोशिश की, उसके निजी अंगों में हाथ डाला और मानवता को शर्मसार किया। गांव के ही कुछ लोगों के प्रयास से महिला को बचाया ज सका। अत्यंन्त पिछड़ी जाति की महिला के पति पूना में मजदूरी करते हैं। महिला अस्वस्थ बूढ़ी सास के साथ रहती है और उसके तीन बच्चे हैं। उसे अपना सब काम खुद करना पड़ता है। गांव लौट आए पति ने बताया कि इससे गांव के कई लोग इर्ष्या करते थे और उसकी पत्नी जब बाजार से अकेली लौट रही थी इस तरह की घटना को अंजाम दिया। यदि कोई बात होगी तो मैं फैसला करूँगा। गांव के असामाजिक तत्व कौन होते हैं? जब टीम गांव में पहुंची तो कुछ लोग बैठे थे एक चबूतरे पर और इस घटना पर महिला संगठनों, सामाजिक । संगठनों एवं राजनीतिक पार्टियों के आने-जाने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस गाँव जब यज्ञ हुआ तो कोई नहीं दिखाई पड़ा। गांव में कई महिलाएं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रहीं थीं कि उन्होंने निर्दोष लोगों को फंसा दिया है। आमतौर पर तो लोग बोलने को तैयार नहीं थे। बहुत कुरेदौने पर कोई महिला के चरित्र पर सवाल उठाता तो किसी का कहना था गलत हुआ। ऐसा रहा तो यह किसी के साथ भी हो सकता है। टीम जब नूरसराय डीएसपी से मिली तो उनका कहना था कि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें 10 को जेल भेज दिया गया है। के चार्जशीट की तैयारी चल रही है। स्पीडी ट्रायल करके दोषियों को सजा दी जाएगी। केस इंचार्ज दीप्ति कुमारी से भी टीम की मुलाकात हुई। महिला संगठनों ने सरकार से मांग किया किः- – महिला को शर्मशार करने के हुजूम में शामिल सभी दोषियों को स्पीडी ट्रायल के तहत सजा दें। – पीड़िता को सुरक्षा की गारंटी करें। पूरे बिहार में महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर अविलंब रोक लगनी चहिए।

एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं महिलाएं महिला सशक्तिकरण का नारा धोखा

5 अप्रैल को महिला संगठनों की ओर आयोजित की जाएगी सभा

जे टी न्यूज, पटना: महिला संगठनों की एक संयुक्त जांच टीम जिसमें अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोशिएशन, ऐपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज चौबे, ऐडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामपरी, विहार महिला समाज की पटना जिला सचिव कृष्णा देवी व कार्यकारिणी सदस्य रिकू कुमारी, बिहार महिला समाख्या की रत्ना, इबतिदा नेटवर्क, बिहार की अख्तरी बेगम व महिला दलित विकास मंच की प्रतिमा शामिल थीं, नालंदा जिला के नूरसराय थाना के अजयपुर गांड का दौरा किया. अजय पुर में 26 मार्च की शाम सरेआम एक महिला को गुण्डों ने सामूहिक बलात्कार की कोशिश की, उसके निजी अंगों में हाथ डाला और मानवता को शर्मसार किया। गांव के ही कुछ लोगों के प्रयास से महिला को बचाया ज सका।

अत्यंन्त पिछड़ी जाति की महिला के पति पूना में मजदूरी करते हैं। महिला अस्वस्थ बूढ़ी सास के साथ रहती है और उसके तीन बच्चे हैं। उसे अपना सब काम खुद करना पड़ता है। गांव लौट आए पति ने बताया कि इससे गांव के कई लोग इर्ष्या करते थे और उसकी पत्नी जब बाजार से अकेली लौट रही थी इस तरह की घटना को अंजाम दिया। यदि कोई बात होगी तो मैं फैसला करूँगा। गांव के असामाजिक तत्व कौन होते हैं?

जब टीम गांव में पहुंची तो कुछ लोग बैठे थे एक चबूतरे पर और इस घटना पर महिला संगठनों, सामाजिक । संगठनों एवं राजनीतिक पार्टियों के आने-जाने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस गाँव जब यज्ञ हुआ तो कोई नहीं दिखाई पड़ा।

गांव में कई महिलाएं पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रहीं थीं कि उन्होंने निर्दोष लोगों को फंसा दिया है। आमतौर पर तो लोग बोलने को तैयार नहीं थे। बहुत कुरेदौने पर कोई महिला के चरित्र पर सवाल उठाता तो किसी का कहना था गलत हुआ। ऐसा रहा तो यह किसी के साथ भी हो सकता है।

टीम जब नूरसराय डीएसपी से मिली तो उनका कहना था कि 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें 10 को जेल भेज दिया गया है। के चार्जशीट की तैयारी चल रही है। स्पीडी ट्रायल करके दोषियों को सजा दी जाएगी। केस इंचार्ज दीप्ति कुमारी से भी टीम की मुलाकात हुई।

महिला संगठनों ने सरकार से मांग किया किः-

– महिला को शर्मशार करने के हुजूम में शामिल सभी दोषियों को स्पीडी ट्रायल के तहत सजा दें।

– पीड़िता को सुरक्षा की गारंटी करें।

पूरे बिहार में महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर अविलंब रोक लगनी चहिए।

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